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Sakat Chauth Vrat Katha: सकट चौथ व्रत आज, गणेश जी की कृपा पाने के लिए जरूर पढ़ें यह व्रत कथा

Sakat Chauth2026: हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार का विशेष महत्व बताया गया है. साल 2026 में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी को पड़ा है. आज इस व्रत को रखा जा रहा है. इस दिन व्रत कथा पढ़ने का विशेष महत्व है.

Published by Tavishi Kalra

Sakat Chauth Vrat Katha: सकट चौथ का व्रत आज यानि 6 जनवरी, मंगलवार को रखा जा रहा है. इस व्रत को संतान के कल्याण के लिए रखा जाता है. सकट चौथ व्रत के दिन इस व्रत की कथा को जरूर पढ़ें. यह पढ़ें संपूर्ण व्रत कथा.

सकट चौथ की व्रत कथा

देवरानी जेठानी की कथा

 प्राचीनकाल का वृतान्त है, एक देवरानी एवं जेठानी थी. उनके पति सगे भाई थे. यद्यपि दोनों भाई एक ही परिवार से थे, तथापि बढ़ा भाई अत्यन्त धनवान एवं छोटा भाई अत्यन्त निर्धन था. छोटा भाई लकड़ी बेचकर अपना जीवन-यापन करता था, जो कि रसोई के लिये प्रयोग की जाती थीं.

छोटे भाई की पत्नी भगवान गणेश की परम भक्त थी तथा प्रत्येक संकष्टी चतुर्थी व्रत का पालन करती थी. अपने कुटुम्ब का पालन-पोषण करने हेतु वह बड़ी भाभी के घर में कार्य भी करती थी.

एक समय की बात है, सकट चौथ के दिन देवरानी के पास पकाने को कुछ भी नहीं था. इसीलिये उसने अपनी भाभी के घर पर कठिन परिश्रम से कार्य किया ताकि सकट चौथ के शुभ अवसर पर उसे कुछ धन प्राप्त हो जाये. परन्तु जेठानी ने पूजा के दिन पारिश्रमिक देने से मना कर दिया तथा कहा कि पूजा के अगले दिन ही देवरानी को पारिश्रमिक देगी. देवरानी थकी-हारी खाली हाथ घर लौट आयी. इस अन्याय से भगवान गणेश जेठानी भाभी पर कुपित हो गये.

सन्ध्याकाल में जब देवरानी का पति काम से लौटा, तो पत्नी भोजन परोसने में असमर्थ थी. पति भी क्रोधित था क्योंकि सकट चौथ के दिन किसी ने भी लकड़ियाँ क्रय नहीं की थीं. भोजन न पकाने के कारण पति ने क्रोध में पत्नी की पिटाई कर दी. वह दुखी पत्नी बिना भोजन करे ही शयन करने चली गयी.

रात्रि के समय भगवान गणेश स्वयं उसके घर आये. जब उन्होंने द्वार खोलने को कहा, तो उसे प्रतीत हुआ कि यह उसका स्वप्न है. देवरानी ने कहा – “हमारे घर में ताले लगाने जैसा कुछ है ही नहीं, सभी द्वार खुले हैं, आप आ जाइये.” भगवान गणेश ने घर में प्रवेश किया तथा देवरानी से भोजन माँगा. देवरानी ने कहा – “सुबह बथुआ पकाया था, वही चूल्हे पर रखा है, आप ग्रहण कर लीजिये.” गणेश जी ने बथुआ का सेवन करने के उपरान्त कहा कि वे शौच करना चाहते हैं. देवरानी ने उत्तर दिया – “घर के पाँचों स्थान, अर्थात् चारों कोने एवं द्वार आपके लिये खुले हैं.” तदुपरान्त भगवान गणेश ने पोंछने के लिये कुछ माँगा. भूखी एवं क्रोधित देवरानी ने कहा – “आप मेरे मस्तक का ही उपयोग कर लीजिये.”

अगले दिन जब वह देवरानी उठी, तो देखा कि उसका माथा, घर के चारों कोने तथा प्रवेश द्वार आदि सभी स्थान बहुमूल्य हीरे, स्वर्ण तथा आभूषण आदि से भरे हुये हैं. तब उसे बोध हुआ कि यह सपना नहीं था, वास्तव में भगवान गणेश स्वयं उसके कुटुम्ब को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु पधारे थे. तदुपरान्त वह इस अथाह धन को तौलने हेतु अपनी भाभी के घर तराजू माँगने गयी.

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बड़ी भाभी ने तराजू के नीचे गोंद लगा दी थी. जब जेठानी ने तराजू लौटाया, तो उस पर कुछ आभूषण चिपक गये थे जिससे जेठानी को सत्य ज्ञात हो गया. जेठानी के बारम्बार विनती करने पर देवरानी ने अपने घर पर गणेश जी के आगमन का सम्पूर्ण प्रकरण जेठानी के समक्ष वर्णित कर दिया.

तत्पश्चात् देवरानी की भाँति ही धन-सम्पदा प्राप्त करने हेतु जेठानी ने देवरानी के घर में काम करना आरम्भ कर दिया. अगले वर्ष, जेठानी ने भी वही प्रक्रिया दोहराई जो देवरानी ने की थी, यहाँ तक कि सकट चौथ के दिन जेठानी ने पति से स्वयं की पिटाई भी करवायी ताकि वैसा ही फल प्राप्त हो जैसा देवरानी को हुआ था. सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, किन्तु धन-सम्पदा के स्थान पर सम्पूर्ण घर में मल एवं दुर्गन्ध फैल गयी थी. जेठानी द्वारा नाना प्रकार से स्वच्छ करने पर भी वह मल नहीं हट रहा था. पण्डितों ने सलाह दी कि यदि जेठानी अपनी सम्पत्ति को देवरानी के साथ समान भाग में बाँट ले, तो गणेश जी के श्राप का शमन हो सकता है.

जेठानी ऐसा ही किया, परन्तु गन्ध एवं मल नहीं हटा. तदनन्तर यह ज्ञात हुआ कि जेठानी ने एक हार देवरानी से साझा नहीं किया था. जेठानी द्वारा हार देने के उपरान्त भगवान गणेश का श्राप पूर्णतः समाप्त हो गया.

इस कथा का श्रवण करने के उपरान्त भक्तगण देवरानी की भाँति कृपा व आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु भगवान गणेश से प्रार्थना करते हैं.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Tavishi Kalra

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