Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.
भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया बहुत जल्दी भगवत प्राप्ति कैसे होगी.
प्रेमानंद जी महाराज ने इस बात का एक छोटा सा जवाब दिया रोना, खूब नाम जप करें, नाम-जप करते करते जब जगह से हार जाएंगे और अपने में सामर्थ नहीं रहेगा तो रोना आएगा, जो सामर्थ हीन होगा उसको रोना आएगा, जब तक अपने में करने का राग है तो खूब करो, जब करते करते हार जाओगे तो रोना आएगा, कि आज का भी दिन गया भगवान नहीं मिले. क्या करें, कहां जाएं, किसके पैर पड़े, यह सभी सवाल मन में आएंगे. वो चिल्ला-चिल्ला के रोता है आ हरि, और भगवान का नाम लेता है. यहां से भगवत प्राप्ति होती है.
“कबीरा हंसना छोड़ दे,
रोवन से कर प्रीत
बिन रोये कित पाइए,
वह प्रेम प्यारा मीत”
भगवान से जल्दी हम मिलना कहां चाहते हैं, हम चैन से सो रहे हैं, बढ़िया भोजन पा रहे हैं. बढ़िया दिनचर्या चल रही है तो यह कोई भगवान से मिलने की चाह है, भगवान से मिलने की चाह में खान-पान सब छूट जाता है, कुछ अच्छा नहीं लगता. जीना मुश्किल हो जाता है कैसे आकाश को हाथ से पकड़ना हो तो यह हमारी सामर्थ नहीं है कैसे पकड़े, तो वह रोता है, बिलखता है, उसी रोने में अनंत जन्मों के सुख, संस्कार नष्ट हो जाते हैं.
भगवान के लिए विराह को जगाना चाहिए, इसके लिए भजन करना बेहद जरूरी है. भगवान की लीला कथा, पढ़ो, सुनों, भगवान से प्रार्थना करें, की रोना आ जाए, तड़पना आ जाएं, विकलता आ जाए, आपके बिना जीना ना जाएं ऐसा विराह दे दो
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