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Premanand Ji Maharaj: भक्ति में लगाने के बाद 1-2 दिन के अंदर क्यों भटक जाता है, जानें रहस्य

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल वचन लोगों को उनके जीवन के प्रेरित करते हैं. नाम जप, भगवान की सेवा, माता-पिता की सेवा करना ही परम सेवा है. जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज से भक्ति में लगाने के बाद 1-2 दिन के अंदर क्यों भटक जाता है, जानें रहस्य.

By: Tavishi Kalra | Published: January 7, 2026 8:07:43 AM IST



Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.

भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि मन भक्ति में क्यों स्थिरता से नहीं लगता, 1-2 दिन क्यों भटक जाता है, जानें इस प्रश्न का उत्तर

प्रेमानंद जी महाराज इस प्रश्न के उत्तर में बताते हैं कि जबान से नाम जप करें, जब तक मन में मलीनता या गंदगी है तब तक मन भागता है, जहां निर्मल मन हुआ तो शांत होकर भगवान में लग जाता है. सर्व पापों का नाश करने के लिए भगवान का नाम है. 

“नाम संकीर्तनं यस्य सर्व पाप प्रणाशनम्। प्रणामो दुःख शमनः तं नमामि हरिं परम्।।”

आधा घंटा नाम जप करें, माला से, काउंटर से अगर पढ़ें आप पढ़ सकते हैं तो श्रीमद्भागवत का एक अध्याय रोज पढ़ें, नाम कीर्तन, नाम जप और भगवान की लीलाएं श्रवण से हमारा मन पवित्र होने लगता है. जिनता पवित्र होता है उतना भगवान में लगता है और जितना अपवित्र होता है उतना संसार में लगता, जब-जब संसार में मन जाए तो वह अपवित्र है इसीलिए हमको निरंतर और बराबर अभ्यास करते रहना चाहिए. हम चाहते हैं और फिर ना हो ऐसा कैसा हो सकता है. हमारी और भी चाहते हैं तो उन चाहतों में मन जाता है अगर केवल चाह हो जाए की भजन करना है तो आपका मन कभी नहीं भटकेगा.

अभ्यास करें, अभ्यास के द्वार हम अपने मन को भगवान में लगा सकते हैं. 30 मिनट रोज अभ्यास करें , इसको 1 माह तक करें. इस दौरान अगर आपसे कोई बात करने आएगा तो आपको बुरा लगेगा, इसका अर्थ है आपका मन भगवान का नाम लेने के लिए राजी हो गया है. इसके बाद आनंद की अनुभूति होगी, नाम जप को अभ्यास में लाएं, रोज करें, धीरे-धीरे मन लगने लगेगा.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता 

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