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Pradosh Vrat Katha: साल का आखिरी प्रदोष व्रत आज, यहां पढ़ें बुध प्रदोष व्रत की कथा

Pradosh Vrat Katha: आज का दिन बेहद खास है, आज साल 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. इस दिन को भगवान शिव और माता पार्वती के लिए रखा जाता है. इस व्रत को रखने से मनोवांच्छित फल की प्राप्ति होती है.

Published by Tavishi Kalra

Pradosh Vrat Katha in Hindi: आज का दिन बेहद शुभ है. आज साल का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. 17 दिसंबर, 2025 बुधवार के दिन साल 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला यह व्रत बुधवार के दिन पड़ रहा है. मान्यता है इस प्रदोष व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के शादीशुदा जीवन में सुख समृद्धि बढ़ती है.

प्रदोष व्रत को रखने से भगवान शिव से साथ माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है. प्रदोष व्रत रखने से और इस दिन व्रत की कथा का पाठ करने से मन की इच्छा पूर्ण होती है.

बुध प्रदोष व्रत कथा ( Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi )

प्राचीन काल की कथा है, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था. वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लिवाने के लिए अपनी ससुराल पहुंचा और उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जायेगा. उस पुरुष के सास-ससुर ने, साले-सालियों ने उसको समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष अपनी जिद से टस से मस नहीं हुआ.

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विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा. पति-पत्नी बैलगाड़ी में चले जा रहे थे. एक नगर के बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी. पति लोटा लेकर पत्नी के लिए पानी लेने गया. जब वह पानी लेकर लौटा तो उसके क्रोध और आश्चर्य की सीमा न रही, क्योंकि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के लाये लौटे में से पानी पीकर हंस-हंसकर बतिया कर रही थी. क्रोध में आग-बबूला होकर वह उस आदमी से झगड़ा करने लगा. मगर यह देखकर आश्चर्य की सीमा न रही कि उस पुरुष की शक्ल उस आदमी से हू ब हू मिलती थी. हम शक्ल आदमियों को झगड़ते हुए जब काफी देर हो गई तो वहां आने-जाने वालों की भीड़ एकत्र हो गई, सिपाही भी आ गया. सिपाही ने स्त्री से पूछा कि इन दोनों में से कौन सा आदमी तेरा पति है, तो वह बेचारी असमंजस में पड़ गई, क्योंकि दोनों की शक्ल एक-दूसरे से बिल्कुल मिलती थी.

बीच राह में अपनी पत्नी को इस तरह लुटा देखकर उस पुरुष की आंख भर आई. वह शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा, कि हे भगवान आप मेरी पत्नी की रक्षा करो. मुझसे बड़ी भूल हुई जो मैं बुधवार को पत्नी को विदा करा लाया. भविष्य में ऐसा अपराध कदापि नहीं करूंगा. उसकी वह प्रार्थना जैसे ही पूरी हुई कि दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया और वह पुरुष सकुशल अपनी पत्नी के साथ अपने घर पहुंच गया. उस दिन के बाद पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत रखने लगे. बोलो भगवान शिव की जय. बोलो माता पार्वती की जय.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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