Categories: धर्म

Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत आज, जरूर पढ़ें यह गुरु प्रदोष व्रत की कथा

Pradosh Vrat Katha: आज 1 जनवरी 2026 को गुरु प्रदोष व्रत है. इस दिन भगवान शिव के लिए व्रत किया जाता है और प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त देखकर पूजा-पाठ किया जाता है. इस दिन व्रत कथा पढ़ने का विशेष महत्व है.

Published by Tavishi Kalra

Pradosh Vrat Katha: आज भगवान शिव के लिए रखा जाने वाला व्रत प्रदोष व्रत है. यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ने से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहेंगे. इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना के साथ जरूरी है व्रत की कथा भी करना, यहां पढ़ें गुरु प्रदोष व्रत की कथा.

गुरु प्रदोष व्रत कथा

एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ. देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला. यह देख वृत्रासुर अत्यन्त क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ. आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया. सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे.
बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हे वृत्रासुर का वास्तविक परिचय दे दूं.

वृत्रासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है. उसने गन्धमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न किया. पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था. एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया. वहां शिव जी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहास पूर्वक बोला- हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं. किन्तु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे.

चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिव शंकर हंसकर बोले- हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है. मैंने मृत्युदाता कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारण जन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!

माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुई- अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्‍वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है. अतएव मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा, अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे शाप देती हूं.

जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हो गया और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्रासुर बना.

गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिव भक्त रहा है. अतः हे इन्द्र तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर शंकर भगवान को प्रसन्न करो. देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया. गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इन्द्र ने शीघ्र ही वृत्रासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शान्ति छा गई.

Baby Massage Tips: सर्दियों में बेबी मसाज करते समय न करें ये 6 बड़ी गलतियां, जानें सही तरीका

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Tavishi Kalra
Published by Tavishi Kalra

Recent Posts

Gold Price Today: मुंबई से लेकर दिल्ली तक! क्या है आज आपके शहर में सोने का दाम? खरीदने से पहले जरूर पढ़ लें

Gold Rate: इस हफ़्ते सोने की कीमतों में कमज़ोरी के साथ शुरुआत हुई, सोमवार को…

February 17, 2026

क्या आप भी हैं गोल गप्पा पगलू? इस Video को देखते ही मचल जाएगा ‘जी’, आज ही खाना छोड़ देंगे पानीपुरी

Rat Swims Viral Video : अमृतसर के एक पानीपुरी (गोलगप्पा) स्टॉल का वीडियो सोशल मीडिया…

February 17, 2026