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Pitru Paksha 2025: गर्भ में ही हो गई हो बच्चे की मृत्यु, तो कर सकते हैं श्राद्ध या नहीं? जाने क्या लिखा है शास्त्रों में

Shradh 2025: पितृ पक्ष किस उम्र तक के बच्चों का श्राद्ध किया जाता है और जिन बच्चों की मृत्यु गर्भ में ही हो गई हो, तो उनका श्राद्ध कर सकते हैं या नहीं? अगर हां तो कैसे और अगर नहीं तो क्यों…. तो चलिए जानते हैं यहां

Published by chhaya sharma

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष चल रहे हैं और इसका समापन होने में सर्फ दो दिन बचे हैं. पितृ पक्ष के 15 दिनों में पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, क्योंकि ऐसा करने से पितृ को तृप्त और मोक्ष मिलता. क्योंकि कहा जाता है, कि पितृ पक्ष में पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं. पितृ पक्ष में लोगों को अपने पूर्वज यानी बड़े-बुजुर्गों के श्राद्ध का नियम तो पता होते हैं, लेकिन कई लोगों इस बात को लेकर बहुत कंफ्यूजन होती है कि जन्म लेने के बाद किस उम्र तक के बच्चों का श्राद्ध किया जाता है और जिन बच्चों की मृत्यु गर्भ में ही हो गई हो, तो उनका श्राद्ध किया जाता है ? अगर हां तो कैसे और अगर नहीं तो क्यों…. तो चलिए जानते हैं यहां 

गर्भ में संतान की मृत्यु होने पर उसका श्राद्ध किया जाता है या नहीं करें?

महिलाओं के साथ कई बार ऐसा होता है कि किसी कारणवश गर्भावस्था के दौरान संतान की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे में शास्त्रों के अनुसार उस संतान श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है. लेकिन अजन्मी संतान की आत्मा की शांति के लिए मलिन षोडशी परंपरा का निर्वहन किया जाता है.मलिन षोडशी हिंदू धर्म में मृत्युपरांत में किया जाने वाला एक अनुष्ठान होता, जो मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति और परिवार पर होने वाले अशुभ प्रभाव से बचाने के लिए किया जाता है. मलिन षोडशी की क्रिया मृत्यु के दौरान अंतिम संस्कार तक के समय में की जाती है

किस उम्र तक के बच्चों का नहीं किया जाता श्राद्ध ?

जिन बच्चों की मृत्यु जन्म के बाद बाद हो जाए, उन बच्चों के श्राद्ध के नियम बच्चों की मृत्यु की उम्र पर निर्भर करता हैं. 2 वर्ष से कम उम्र के नवजात शिशु से का कोई श्राद्ध नहीं  किया जाता, इनकी भी मलिन षोडशी होती है और तर्पण किया जाता है और इन बच्चों का श्राद्ध और वार्षिक क्रिया नहीं होती है.

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किस तिथि में करना चाहिए बच्चों का श्राद्ध ?

6 साल से बड़े बच्चे की मृत्यु तिथि पर ही पितृपक्ष में उसका श्राद्ध किया जाता है, लेकिन तिथि का पता ना हो तो, ऐसे में आप त्रयोदशी पर पूर्ण विधि विधान से श्राद्ध कर सकते है और उनकी आत्मा को शांती पहुंचा सकते हैं, इसके अलावा त्रयोदशी तिथि में ही तर्पण करना चाहिए, ऐसा करने से बच्चों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

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