वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का उत्तर-पूर्व कोना यानी ईशान कोण दिव्य ऊर्जा का केंद्र होता है. यह दिशा मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास और समृद्धि से जुड़ी होती है. कहा जाता है कि इसी दिशा से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है, इसलिए इसे हमेशा खुला, साफ और हल्का रखना चाहिए.
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ईशान कोण में टॉयलेट-बाथरूम बनाना क्यों है अशुभ
इस दिशा में टॉयलेट या बाथरूम का निर्माण करना वास्तु के अनुसार बेहद अशुभ माना जाता है. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है, जिसका असर मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह के रूप में देखने को मिल सकता है.
भारी सामान रखने से रुक सकती है तरक्की
ईशान कोण में भारी फर्नीचर, अलमारी या स्टोर रूम बनाना भी सही नहीं माना जाता. इससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है, जिससे जीवन में रुकावटें आती हैं और व्यक्ति की प्रगति प्रभावित हो सकती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण में किचन बनाना उचित नहीं होता. रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा बेहतर मानी जाती है. अगर किचन इस दिशा में हो, तो घर में विवाद, असंतुलन और तनाव बढ़ सकता है.
कूड़ा रखने से बढ़ती है नकारात्मकता
इस स्थान पर कूड़ा-करकट या बेकार सामान रखना भी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. इससे घर का वातावरण प्रभावित होता है और सुख-शांति में बाधा आती है. इसलिए इस कोने को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए. ईशान कोण में शयनकक्ष बनाना, खासकर शादीशुदा लोगों के लिए, सही नहीं माना जाता. इससे रिश्तों में तनाव, मानसिक अशांति और आपसी दूरी बढ़ सकती है. यह दिशा पूजा-पाठ, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यहां मंदिर या ध्यान का स्थान बनाने से घर में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि बनी रहती है.=