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Magh Mela Snan: मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, अब कब-कब हैं पावन स्नान? यहां जानें उनके महत्व

Magh Mela Snan 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मकर संक्रांति और एकादशी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पावन स्नान करते हुए आस्था की डुबकी लगाई. गौरतलब है कि हिंदू धर्म में स्नान का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है. खासकर गंगा नदी में किए जाने वाले स्नान को पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति का साधन माना जाता है.

Published by Hasnain Alam

Magh Mela Snan 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मकर संक्रांति और एकादशी के मौके पर पावन स्नान को लेकर श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह देखने को मिला. आस्था की डुबकी लगाने वालों लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वर्गीय मां की तस्वीर की भी डुबकी लगवाई. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री देश के लिए काम कर रहे हैं, ऐसे में उनकी मां को भी पुण्य प्राप्त हो.

बता दें कि हिंदू धर्म में स्नान का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. खासकर गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में किए जाने वाले स्नान को पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति का साधन माना जाता है. हर साल मकर संक्रांति से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक कई विशेष स्नान पर्व हैं, जिनका इंतजार श्रद्धालु करते हैं.

मकर संक्रांति से होती है स्नानों की शुरुआत

ऐसा माना जाता है कि इन दिनों किया गया स्नान जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है. इन स्नानों की शुरुआत मकर संक्रांति से होती है, जो साल 2026 में 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है.

धार्मिक मान्यता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है.

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अब 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर स्नान करेंगे श्रद्धालु

फिर मौनी अमावस्या, जो 18 जनवरी को पड़ेगी. माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. माना जाता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है. लोग इस दिन मौन रखकर गंगा स्नान करते हैं. कहा जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन किया गया स्नान व्यक्ति को पापों से मुक्त करता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है.

कब है तीसरा पावन स्नान?

माघ पूर्णिमा तीसरा प्रमुख स्नान पर्व है, जो 1 फरवरी को मनाई जाएगी. माघ पूर्णिमा का स्नान सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. इस दिन स्नान के साथ-साथ तिल, अन्न, वस्त्र, घी और कंबल का दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है.

25 मई को मनाया जाएगा गंगा दशहरा पर्व

इसके बाद गंगा दशहरा पर्व आता है, जो 25 मई को मनाया जाएगा. यह पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है. मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पूजा, दान और गंगा आरती का विशेष महत्व होता है.

कब है साल का अंतिम पावन स्नान?

वहीं साल का अंतिम प्रमुख स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा है, जो 24 नवंबर को है. इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने से आत्मिक शुद्धि होती है. कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है और दीपदान को बहुत शुभ माना जाता है.

Hasnain Alam

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