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Lohri 2026: हर साल 13 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व जानें खास वजह

Lohri 2026: लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत में विशेष महत्व रखता है. इस पर्व को खास तौर पर पंजाबी और सिख धर्म के लोग मनाते हैं. लोहड़ी का पर्व हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है. यह पर्व मकर संक्रांति के दिन पूर्व आता है.

By: Tavishi Kalra | Published: January 7, 2026 8:37:49 AM IST



Lohri 2026: लोहड़ी भारत का एक लोकप्रिय त्यौहार है. यह त्यौहार मुख्य रूप से सिख धर्म के पंजाबी लोगों द्वारा मनाया जाता है. इस पर्व को बहुत हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है. लोहड़ी मुख्य रूप से सिख धर्म का त्योहार है, लोहड़ी का दिन हिंदू कैलेण्डर के आधार पर ही निश्चित किया जाता है. लोहड़ी बहुत हद तक मकर संक्रान्ति से जुड़ा है. लोहड़ी को लाल लोई के नाम से भी जाना जाता है.

साल 2026 में लोहड़ी कब?

सूर्य जिस दिन मकर संक्रांति में प्रवेश करते हैं उस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है.  लोहड़ी का पर्व  कृषि-संस्कृति और सामूहिक जीवन से जुड़ा है. साल 2026 में लोहड़ी 13 जनवरी, मंगलवार के दिन है. यह पर्व शीत ऋतु के विदा होने और रबी की फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है.

क्यों मनाते हैं लोहड़ी?

लोहड़ी सूर्य, अग्नि और फसल से जुड़ा पर्व है. इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने से पहले की आखिरी रात का प्रतीक है. यह दिन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है. इस दिन आग के चारों ओर परिक्रमा की जाती है और उसमें तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ीस मक्का डाले जाते हैं. यह तीजें अर्पित करने का अर्थ है प्रकृति को धन्यवाद देना. इस दौरान पारंपरिक गाने गाए जाते हैं और इस पर्व को मनाया जाता है. सिख समुदाय में लोहड़ी का पर्व शादी के बाद और बच्चा होने के पूर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. 

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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