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Kharmas End Date 2026: 13 या 14 अप्रैल कब खत्म हो रहे खरमास, क्या होता है इसका असली मतलब?

Kharmas End Date 2026: काफी दिनों से हिंदू धर्म में खराब दिन चल रहे हैं मतलब की खरमास, इन दिनों कोई भी अच्छे काम नहीं किए जाते हैं. आइए जानते हैं कि कब खत्म हो रहे खरमास-

By: sanskritij jaipuria | Published: April 5, 2026 3:52:35 PM IST



Kharmas End Date 2026: हिंदू परंपराओं में हर काम का एक सही समय माना जाता है. ऐसा नहीं कि हर दिन एक जैसा होता है कुछ दिन नए काम शुरू करने के लिए अच्छे माने जाते हैं, तो कुछ समय ऐसा होता है जब थोड़ा रुककर सोचना बेहतर समझा जाता है. खर्मास भी ऐसा ही एक दौर है, जिसमें शुभ कार्यों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है.

खर्मास साल में दो बार आता है और लगभग एक महीने तक चलता है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते. ये समय तब माना जाता है जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करता है, जिसे पारंपरिक रूप से कम अनुकूल माना गया है.

 2026 में खर्मास कब खत्म होगा?

साल 2026 में खर्मास 14 अप्रैल को समाप्त होगा, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा. इसके बाद 15 अप्रैल से फिर से सभी शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं. ये समय नए कामों और बड़े फैसलों के लिए अच्छा माना जाता है.

 क्यों टाले जाते हैं शुभ काम?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खर्मास के दौरान सूर्य की स्थिति थोड़ी कमजोर मानी जाती है. ज्योतिष में सूर्य को शक्ति और अधिकार का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस समय किए गए शुभ कार्यों के परिणाम उतने अच्छे नहीं माने जाते.

 इस दौरान किन कामों से बचते हैं लोग?

खर्मास के समय आमतौर पर लोग कई बड़े और शुभ कार्यों को टाल देते हैं, जैसे:

 शादी और सगाई
 गृह प्रवेश
 नामकरण और मुंडन
 नया व्यापार शुरू करना
 जमीन या बड़ी खरीदारी करना

 खर्मास के बाद शुभ तारीखें (अप्रैल 2026)

खर्मास खत्म होने के बाद कुछ तारीखें खास तौर पर शुभ मानी जाती हैं:

शादी के लिए शुभ दिन:
15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29 अप्रैल

गृह प्रवेश के लिए शुभ दिन:
21 अप्रैल

 खर्मास का असली मतलब

खर्मास को सिर्फ रोक-टोक के रूप में नहीं देखना चाहिए. ये एक छोटा सा विराम होता है, जो हमें सोचने और सही समय का इंतजार करने का मौका देता है. इसके खत्म होते ही जीवन फिर से अपनी रफ्तार पकड़ लेता है, लेकिन थोड़ी ज्यादा समझदारी के साथ.

डिस्क्लेमर- ये जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है. इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इनखबर इसकी पुष्टी नहीं करता है.

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