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Kharmas 2025: खरमास कब से हो रहा है शुरू? जानें क्यों माना जाता है ये अशुभ

Kharmas 2025: 16 दिसंबर 2025 को एक बार फिर खरमास की शुरुआत हो रही है. हिंदू धर्म में इस माह को अशुभ माना जाता है. इस दौरान कोई भी मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. तो आइए जानते हैं कि खरमास को क्यों अशुभ माना जाता है?

Published by Shivi Bajpai

Why Kharmas Considered Inauspicious: खरमास साल में दो बार लगता है. खरमास की अवधि को हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है. खरमास दिसंबर मध्य से जनवरी में मकर संक्रांति तक रहता है. इसलिए इस दौरान शुभ कार्मों को नहीं करना चाहिए. 16 दिसंबर 2025 को एक बार फिर खरमास की शुरुआत हो रही है. खरमास की अवधि एक महीने की होती है. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.

खरमास के अशुभ होने की धार्मिक वजह क्या है?

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सात घोड़ो पर सवार होकर भगवान सूर्य ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं. भगवान सूर्य कभी भी रुकते नहीं हैं. उनके रुकते ही संसार ठहर जाएगा. भगवान सूर्य के घोड़े लगातार दौड़ते रहने और विश्राम न मिलने की वजह से भी थक जाते हैं. एक बार भगवान सूर्य ने अपने घोड़ों की दयनीय स्थिति देखी तो उनका मन द्रवित हुआ. फिर वो अपने घोड़ों को एक तालाब के किनारे ले गए. इसके बाद उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि अगर रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा, लेकिन घोड़ों का सौभाग्य था कि भगवान सूर्य को तलाब किनारे दो गधे मिल गए.

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तब भगवान ने घोड़ों को विश्राम के लिए छोड़ दिया और गधों को अपने रथ में जोड़ लिया. इस वजह से रथ की गति धीमी हो गई थी. इससे सूर्य के तेज में भी कमी आ गई. फिर एक मास का चक्र पूरा होते ही भगवान ने घोड़ों को रथ में वापस जोड़ लिया. इस तरह सूर्य जब भी धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास लगता है.

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खरमास के अशुभ होने का ज्योतिषीय कारण

भगवान सूर्य का प्रवेश जब गुरु की राशि धनु या मीन में होता है, तो गुरु ग्रह के प्रभाव में कमी आ जाती है. शुभ कामों के लिए गुरु का प्रभावी आवश्यक होता है, इसलिए भगवान सूर्य के धनु या मीन राशि में प्रवेश करते ही शुभ काम रोक दिए जाते हैं. ज्योतिष के अनुसार, भगवान सूर्य और गुरु में शत्रुता है, इसलिए जब भगवान सूर्य गुरु की राशि में जाते हैं, तो अपना तेज कम कर देते हैं. इस वजह से भगवान सूर्य शुभ फल प्रदान नहीं करते.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Shivi Bajpai
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