Categories: धर्म

Kullu Dussehra : कब हुई थी कुल्लू दशहरे की शुरुआत, क्या होता है इसमें और इसे कैसे मनायया जाता है?

Kullu Dussehra : कुल्लू दशहरा हिमाचल का अनोखा त्योहार है जहां देवताओं का भव्य मिलन होता है. ये 7 दिन चलता है और सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं लोकजीवन का जीवंत उत्सव है.

Published by sanskritij jaipuria

Kullu Dussehra : भारत में दशहरा हर जगह विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. कहीं इसे रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, तो कहीं रामलीला के माध्यम से. लेकिन हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में दशहरा पूरी तरह अलग रंग लेकर आता है. यहां ये पर्व रावण दहन की जगह देवताओं के भव्य मिलन और एकता का उत्सव है, जो इसे देश-विदेश में अपनी अनूठी परंपरा के लिए फेमस बनाता है.

कुल्लू दशहरे की शुरुआत 17वीं शताब्दी में कुल्लू के राजा जगत सिंह ने की थी. एक प्राचीन कथा के अनुसार, राजा पर एक ब्राह्मण परिवार का श्राप लग गया था, जिससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया. अनेक उपायों के बाद एक साधु ने राजा को भगवान राम (रघुनाथ जी) की पूजा करने की सलाह दी. इसके बाद राजा ने रघुनाथ जी की मूर्ति स्थापित कर घाटी के सभी देवताओं को एकत्रित करने का निमंत्रण भेजा. तब से ये पर्व हर साल विजयदशमी से शुरू होकर सात दिनों तक चलता है और अब ये 375 साल पुरानी परंपरा बन चुकी है.

कुल्लू दशहरा का उत्सव

ये त्योहार सात दिनों तक चलता है, जिसमें कुल्लू घाटी के दूर-दराज के गांवों से सजधज कर देवताओं की पालकियां डलपुर मैदान तक आती हैं. ढोल-नगाड़ों की थाप से वातावरण जीवंत हो उठता है. अंतिम दिन भगवान रघुनाथ की रथयात्रा डलपुर मैदान में आयोजित होती है, जहां लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने उमड़ते हैं. ये दृश्य एक ऐसा एक्सपीरिएंस देता है जहां मनुष्य और देवता एक साथ मिलते हैं.

Related Post

अगर आप एक पर्यटक हैं, तो कुल्लू दशहरा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ हिमाचली संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं को करीब से समझने का एक अनूठा अवसर है. यहां के लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक पहनावे आपको हिमाचल की जीवंत सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं. इस समय कुल्लू और आस-पास के होटल तथा होमस्टे जल्दी भर जाते हैं, इसलिए योजना पहले से बनाना जरूरी होता है. कई गांवों में स्थानीय परिवार भी पर्यटकों को अपने घरों में ठहराते हैं, जो हिमाचली मेहमाननवाजी का सच्चा अनुभव देते हैं.

कुल्लू के आसपास घूमने के जगह

दशहरे के उत्सव के साथ-साथ कुल्लू के पास कई खूबसूरत पर्यटन स्थल भी हैं जो आपको प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कराते हैं.

 नग्गर: पुराने कुल्लू साम्राज्य की राजधानी नग्गर अपने किले और निकोलस रोरिक आर्ट गैलरी के लिए जाना जाता है. यहां से घाटी का मनोहारी दृश्य देखा जा सकता है.
 मनाली: कुल्लू से करीब एक घंटे दूर स्थित मनाली साल भर पर्यटकों की पसंदीदा जगह है. हडिम्बा देवी मंदिर, पुराने मनाली के कैफे और देवदार के जंगल यहां की खासियत हैं.
 तीर्थन घाटी: शांति पसंद करने वालों के लिए तीर्थन घाटी और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के ट्रेक्स एक आदर्श विकल्प हैं.
 कसोल और पार्वती घाटी: ट्रेकिंग प्रेमियों और पहाड़ों की शांति चाहने वालों के लिए यह जगह बेहद खूबसूरत है.
 

sanskritij jaipuria

Recent Posts

क्रिकेट के मैदान तक पहुंचा लॉरेंस बिश्नोई गैंग का आतंक; डर के चलते इस टीम ने बदला अपना कप्तान!

Dilpreet Bajwa link Lawrence Bishnoi: भारतीय मूल के क्रिकेटर दिलप्रीत बाजवा, जिन्होंने हाल ही में…

April 20, 2026

SIP में छुपे चार्ज का खतरा! हर निवेशक को जानना जरूरी; यहां समझिए पूरा हिसाब

SIP Installment: अगर आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता और SIP की किस्त…

April 20, 2026

एंट्री पर बैन लगा देंगे… CJI ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार; नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा हुआ है मामला

Supreme Court News: बेंच ने कहा कि यह लोकप्रियता पाने की कोशिश थी और याचिकाकर्ता…

April 20, 2026

PM Modi visit postponed: रिफाइनरी आग के बाद टला PM मोदी का दौरा, RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का सरकार पर हमला

Pachpadra refinery fire: सोमवार को रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिससे मौके…

April 20, 2026