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Chaitra Navratri 2026: क्या आप जानते हैं 25 या 26 कब है दुर्गा अष्टमी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च 2026 को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन मुख्य रूप से शुभ हैं. व्रत और हवन से सुख, समृद्धि और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

By: sanskritij jaipuria | Published: March 22, 2026 2:20:33 PM IST



Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन विशेष रूप से दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी, की पूजा की जाती है. उन्हें शांति, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा, हवन और कन्या पूजन करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

साल 2026 में अष्टमी तिथि दो दिनों तक बनी हुई है, जिससे सही दिन को लेकर भ्रम हो सकता है. दृक पंचांग के अनुसार- अष्टमी तिथि प्रारंभ 25 मार्च 2026, दोपहर 1:50 बजे से हुई और अष्टमी तिथि समाप्त 26 मार्च 2026, सुबह 11:48 बजे होगी. उदय तिथि के अनुसार, मेन पूजा और व्रत 26 मार्च 2026 (गुरुवार) को करना शुभ माना गया है. 25 मार्च को अष्टमी केवल दोपहर से शुरू हो रही है, इसलिए पूर्ण अष्टमी 26 मार्च को मानी जाएगी.

 मां महागौरी का महत्व

मां महागौरी शांत और करुणामयी देवी हैं. वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, चार भुजाओं वाली हैं और उनका वाहन वृषभ है. उनकी पूजा से पाप नष्ट होते हैं, सौभाग्य बढ़ता है और घर में शांति और समृद्धि आती है. नवरात्रि के इस दिन व्रत और साधना का विशेष महत्व है, क्योंकि श्रद्धा पूर्वक की गई आराधना से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं.

 दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजन

कन्या पूजन अष्टमी और महानवमी दोनों दिन किया जाता है. छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा, भोजन और सम्मान देने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं.

 दुर्गा अष्टमी कन्या पूजन: 26 मार्च (गुरुवार)
 महानवमी कन्या पूजन: 27 मार्च (शुक्रवार)

मेन पूजा अष्टमी पर ही करना शुभ माना जाता है.

कन्या पूजन की विधि

1. कन्याओं का स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनाएं.
2. पूजा स्थल पर लाल या पीला आसन बिछाकर कन्याओं को बैठाएं.
3. उनके पैर धोकर तिलक और कुमकुम लगाएं.
4. कन्याओं को नए वस्त्र, चूड़ियां, फूल, मिठाई और दक्षिणा अर्पित करें.
5. हलवा-पूड़ी, चना और फल आदि खिलाएं.
6. अंत में मां दुर्गा की आरती करें और कन्याओं के चरण छूकर आशीर्वाद लें.

इस विधि से घर में सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है.

  
 

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