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आरती के समय आंखें खोलें या बंद? जानें शास्त्रों का सही तरीका

हम सभी भगवान की पूजा और आरती करते वक्त अपनी अपनी आंखें बंद रखते हैं। लेकिन, आरती के समय आंखें बंद करना सही है या नहीं? जानिए शास्त्रों के अनुसार भगवान का प्रत्यक्ष दर्शन क्यों जरूरी है और कैसे खुली आंखों से आरती करने से भक्ति का अनुभव और गहरा होता है।

Published by Shraddha Pandey

आरती हिन्दू पूजा का सबसे भावपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें भक्त दीप, धूप, कपूर और भजन के साथ-साथ भगवान का आचमन करते हैं। लेकिन, एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या आरती के समय आंखें बंद करके भक्ति करना ठीक है, या खुली आंखों से भगवान का दर्शन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है?हाालंकि, अक्सर भगवान की पूजा आरती के वक्त हमारी आंखें बंद ही हो जाती हैं। लोग भगवान को हमेशा बंद आंखों से ही याद करते हैं लेकिन ये कितना सही है आइए जानते हैं?

धर्मग्रंथों में “प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम्” का सिद्धांत है, जिसका सही मतलब है कि प्रत्यक्ष दर्शन ही प्रमाण का सर्वोच्च रूप है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, भगवान की मूर्ति को आंखों से देखना आपके पुण्य को कई गुना बढ़ा देता है। यह दर्शन केवल आँखों का नहीं, बल्कि सौंदर्य, शक्ति और आत्मा से जुड़ने का अनुभव होता है। इसलिए आरती के दौरान यदि आप आंखें बंद करते हैं, तो उस दिव्य जुड़ाव का अनुभव थोड़ा अधूरा रह सकता है। ये बात शायद ही आपको पहले पता होगी।

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क्या कहते हैं शास्त्र

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हालांकि, आंखें बंद करना कई लोगों को मन की गहराई से भक्ति में ले जाता है। इसका उद्देश्य बाहरी दुनिया से ध्यान हटाकर मन को अंदर केंद्रित करना है। लेकिन जब शास्त्र यही कहते हैं कि प्रत्यक्ष दर्शन ही बेहतर होता है, तो उन्हें अनदेखा करना बुद्धिमत्ता नहीं होगी।

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भक्ति का पावन अनुभव

आरती के समय भगवान की मूर्तिपूजा आंखों से करना, सिर्फ आंखों का काम नहीं बल्कि यह आत्मा और भक्ति का संगम है। शास्त्रों की प्रेरणा हमें बताती है कि आंखें खोलकर आरती करना भक्ति को और गहरा बनाता है। ऐसे में, अगली बार जब आप आरती करें, तो खुली आंखों से भगवान को देखेंक्योंकि, प्रत्यक्ष दर्शन में ही भक्ति का असली पावन अनुभव है।

Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

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