क्या आप जानते हैं कि राजस्थान के कौन से गांव को कहा जाता है ‘फौजियों का कारखाना’?

Rajasthan Quiz : राजस्थान के झुंझुनूं जिले का ये गांव 'फौजियों की फैक्ट्री' कहलाता है, जहां हर घर से एक युवा सेना में जाता है. यहां देशभक्ति जीवनशैली का हिस्सा है और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है.

Published by sanskritij jaipuria

Rajasthan Quiz : राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित एक छोटा-सा गांव आज पूरे देश में एक बड़ी मिसाल बन चुका है. इस गांव का नाम है भिर्र, जिसे अब लोग प्यार से ‘फौजियों का कारखाना’ कहने लगे हैं. भिर्र गांव का नाम सुनते ही देशभक्ति की भावना जाग उठती है, क्योंकि यहां का हर घर सेना से जुड़ा हुआ है.

भिर्र गांव की खासियत ये है कि शायद ही कोई ऐसा घर मिलेगा, जहां से कोई युवा सेना में न गया हो, यहां युवाओं का सपना आईएएस या इंजीनियर बनने का नहीं, बल्कि देश की रक्षा करने का होता है. उनका उद्देश्य सिर्फ एक होता है देश सेवा. ये परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.

सेना में भर्ती के लिए जुनून और तैयारी

देश के अन्य हिस्सों में जहां युवा सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में लगे रहते हैं, वहीं भिर्र के युवा बचपन से ही सेना में जाने का सपना संजो लेते हैं. जैसे ही वे भर्ती की उम्र में पहुंचते हैं, पूरी लगन से शारीरिक और मानसिक तैयारी में जुट जाते हैं.

सुबह के समय गांव के मैदानों में दौड़ते, पुश-अप्स करते और कठिन अभ्यास करते युवाओं का नजारा आम है. ये सिर्फ एक तैयारी नहीं, बल्कि उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी है.

बुजुर्गों का मार्गदर्शन

भिर्र के बुजुर्गों की भूमिका भी इस परंपरा को बनाए रखने में अहम है. अधिकांश बुजुर्ग स्वयं सेना में सेवा दे चुके हैं और अब अपने अनुभवों से नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करते हैं. वे न केवल अभ्यास में मदद करते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी युवाओं को तैयार करते हैं कि कठिनाई आने पर हार नहीं माननी.

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एक गांव, हजारों सैनिक

भिर्र गांव की कुल आबादी लगभग 5,000 है, लेकिन इसमें से करीब 1,000 लोग सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इनमें जल, थल और वायु सेना के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों में सेवा देने वाले जवान भी शामिल हैं. यहां के कुछ युवाओं ने हाल ही में लागू हुई अग्निवीर योजना के तहत भी देश सेवा की है.

देशभक्ति की मिट्टी में पले-बढ़े बच्चे

यहां के बच्चों की परवरिश भी खास होती है. जब बच्चे अपने घर के किसी सदस्य को वर्दी में देखते हैं, तो उनके मन में भी वही सपना जन्म लेता है. स्कूलों और गलियों में बच्चे अक्सर सेना की बातें करते हुए पाए जाते हैं. उनके लिए फौजी बनना सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि गौरव और जिम्मेदारी है.

क्यों कहा जाता है “फौजियों की फैक्ट्री”?

भिर्र गांव की आबोहवा, वहां का माहौल, लोगों की सोच और मेहनत ने इस जगह को फौजियों की फैक्ट्री बना दिया है. यहां का हर नागरिक, चाहे वो जवान हो या बुजुर्ग, देश के प्रति समर्पित है. ये जुनून ही है जो इस गांव को देश के बाकी हिस्सों से अलग बनाता है.

भिर्र गांव सिर्फ एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि एक विचारधारा है- देशभक्ति की विचारधारा. यहां के लोग ये साबित कर चुके हैं कि अगर समाज और परिवार एकजुट होकर युवाओं को सही दिशा दें, तो वे असंभव को भी संभव कर सकते हैं.
 

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