60 सेकंड में 16 शास्त्रीय संगीतकार…6 साल के बच्चे ने किया ऐसा कमाल; बन गया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

Shivankh Varun Varadharajan: भारतीय मूल के 6 साल के बच्चे ने 60 सेकंड में 16 शास्त्रीय संगीतकारों को अपने कान से पहचान कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है.

Published by Sohail Rahman

Shivankh Varun Varadharajan: भारतीय मूल के एक 6 वर्षीय बालक ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जब उसने मोजार्ट और बीथोवेन जैसे 16 शास्त्रीय संगीतकारों को मात्र 60 सेकंड में कान से पहचानने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. दुबई के युवा संगीत प्रतिभावान शिवान्ख वरुण वरदराजन ने बाख, मोजार्ट, बीथोवेन, चोपिन, विवाल्डी, चाइकोवस्की, वैगनर, ड्वोरक, मेंडेलसोहन, लिज़्ट, रिचर्ड स्ट्रॉस, जोहान स्ट्रॉस, रॉसिनी और ब्रह्म्स की रचनाओं को अद्भुत सटीकता से पहचाना.

वरदराजन की मां ने क्या कहा?

वरदराजन की मां यालिनी का इसको लेकर बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी मां यालिनी ने बताया कि शिवान्ख में बहुत कम उम्र से ही संगीत के प्रति गहरी रुचि दिखाई देने लगी थी. उनकी मां ने बताया कि लगभग ढाई साल की उम्र में उनका बालक अक्सर टॉम एंड जेरी जैसे कार्टूनों में ऑर्केस्ट्रा के संगीत के साथ गुनगुनाता था. यालिनी ने बताया कि समय के साथ शिवान्ख कुछ ही सेकंड में समान ध्वनि वाले संगीतों में आसानी से अंतर कर लेता था.

गर्व से भरे हुए शिवान्ख की मां ने कहा कि उनका 6 साल का बेटा हमेशा संगीत के माध्यम से दुनिया से जुड़ा रहा है, स्वर और लय के माध्यम से व्यक्तित्व और मनोदशाओं को समझता रहा है. यालिनी ने कहा कि शिवान्ख अक्सर लोगों का वर्णन किसी संगीतकार की संगीत शैली से मिलता-जुलता करके करते हैं, वह बहुत तेज बोल रही थी, रिम्स्की की तरह”, या “वह शांत है, चोपिन की तरह. उनका मानना ​​है कि इस न्यूरोडायवर्जेंट दृष्टिकोण ने उन्हें संगीत का अनुभव एक अनोखे सहज ज्ञान युक्त तरीके से करने में सक्षम बनाया है.

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रिकॉर्ड बनाने का दिन

यालिनी ने कहा कि बहुत कम उम्र से ही शिवान्ख ने संगीत सुनने, गुनगुनाने और अभ्यास करने में घंटों बिताए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने उनकी रुचि को ध्यान से पोषित किया और उन्हें रिकॉर्ड बनाने के लिए संगीतकारों के नामों का अभ्यास करने में मदद की. रिकॉर्ड बनाने के दिन शिवान्ख को पूरी सूची में से शास्त्रीय संगीतकारों को कान से पहचानने के लिए 60 सेकंड का समय दिया गया था. उन्होंने सफलतापूर्वक 16 संगीतकारों की पहचान की.

बच्चे की प्रतिभा को स्वाभाविक रूप से पहचानना चाहिए: यालिनी

शिवांख की मां ने उनकी प्रतिभा को सहयोग और पोषित करने में परिवार की भूमिका को पहचाना, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रतिभा स्वाभाविक रूप से आनी चाहिए, न कि थोपी जानी चाहिए. यालिनी ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि हर बच्चे के अंदर एक दुनिया होती है. कभी-कभी आपको उसे देखने के लिए बस थोड़ा रुकना पड़ता है. ज़्यादा सुनें, कम तुलना करें और उनकी विशिष्टता को स्वाभाविक रूप से प्रकट होने दें. उन्होंने बताया कि परिवार ने शिवांख को आधिकारिक रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के लिए संरचना और अभ्यास प्रदान किया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह औपचारिक परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सके.

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