Dewas Collector Office Scam: मध्य प्रदेश के देवास स्थित कलेक्टर कार्यालय में आदेश जारी करने को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. इस मामले में नजूल शाखा के एक बाबू, दो अलग-अलग तहसीलों के बाबू और एक बिचौलिया शामिल पाए गए हैं. यह घोटाला तब सामने आया जब एक संदिग्ध आदेश पंजीयन कार्यालय पहुंचा और वहां अधिकारियों को उस पर शक हुआ. जांच के बाद मामला गंभीर पाया गया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई.
जांच में खुला संगठित नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहा था. आरोपियों ने मिलकर सरकारी आदेशों और अनुमतियों को फर्जी तरीके से तैयार किया. वे असली प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन करवाते थे, जिससे किसी को संदेह न हो. इसके बाद अधिकारियों के हस्ताक्षर और मुहर की नकल कर दस्तावेज तैयार किए जाते थे.
धारा 165-6 के तहत जमीन के मामले
सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल भू-राजस्व संहिता की धारा 165-6 से जुड़े मामलों में किया गया, जो अनुसूचित जनजाति वर्ग की जमीन के हस्तांतरण से संबंधित होती है. आरोपियों ने बिना अधिकारियों की जानकारी के लगभग एक दर्जन फर्जी आदेश और अनुमतियां जारी कर दीं. इन आदेशों के आधार पर एक जमीन की रजिस्ट्री भी हो चुकी है, जिसे अब निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पुलिस ने उप-पंजीयक की शिकायत पर चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है. गिरफ्तार आरोपियों में नजूल शाखा का बाबू रमेश लोबानिया, एडीएम का रीडर संजय जाटव, विजयगंज मंडी तहसील का बाबू जितेंद्र भद्रे और बिचौलिया महेंद्र कुशवाह शामिल हैं. एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है. पूछताछ के आधार पर मामले की कई परतें खुल रही हैं.
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और संबंधित कर्मचारियों को पद से हटाया जाएगा. पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी की है. यह मामला प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और सतर्कता की आवश्यकता को उजागर करता है.