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School Rules on Sanitary Pads: स्कूल में नहीं मिल रहा सेनेटरी पैड, यहां करें शिकायत, मिनटों में होगा काम

School Rules on Sanitary Pads: अक्सर स्कूल में ऐसा होता है कि लड़कियों को अचानक से मासिक धर्म आ जाता है. ऐसे में क्या आपको पता है कि अगर स्कूल से आपको सैनिटरी पैड न मिले तो आपको क्या करना चाहिए. आइए जानते हैं-

By: sanskritij jaipuria | Last Updated: February 2, 2026 4:57:15 PM IST



 School Rules on Sanitary Pads: स्कूल में अचानक मासिक धर्म शुरू हो जाना कई लड़कियों के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर देता है. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. अब स्कूलों में सेनेटरी पैड देना कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं बल्कि बच्चियों का अधिकार माना जाएगा. कोर्ट ने साफ किया है कि मासिक धर्म और उससे जुड़ी सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

स्कूलों की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और शिक्षा विभागों को निर्देश दिए हैं कि हर स्कूल में लड़कियों के लिए सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं. अगर कोई स्कूल इस जिम्मेदारी को नहीं निभाता या लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है और यहां तक की स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है. इसलिए ये जरूरी है कि अभिभावक और छात्राएं जानें कि अगर जरूरत पड़ती है, तो शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है.

शिकायत कैसे करें?

अगर किसी स्कूल में बच्चियों को सेनेटरी पैड नहीं दिए जा रहे या टालमटोल किया जा रहा है, तो सबसे पहले जिला लेवल पर शिकायत की जा सकती है. इसके लिए आप जिला शिक्षा अधिकारी या जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को लिखित शिकायत दे सकते हैं.

शिकायत में स्कूल का नाम, तारीख, स्थिति और यदि संभव हो तो सबूत भी शामिल करें. अगर स्थानीय लेवल पर सुनवाई नहीं होती है, तो इसे राज्य शिक्षा विभाग या महिला एवं बाल विकास विभाग में भी उठाया जा सकता है.

इसके अलावा शिकायत राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग या राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास भी भेजी जा सकती है. अब ये मामला लड़कियों के अधिकार से जुड़ा है, इसलिए मानवाधिकार आयोग या महिला आयोग जैसे मंचों पर भी बात रखी जा सकती है.

 स्कूलों में बनाए गए नियम

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि स्कूलों में:

 लड़कियों के लिए साफ सुथरा और अलग वॉशरूम होना चाहिए.
 सेनेटरी पैड आसानी से उपलब्ध हों.
 इस्तेमाल किए गए पैड को सुरक्षित तरीके से फेंकने की व्यवस्था हो.

इसके अलावा कई स्कूलों में मेनस्ट्रुअल हाइजीन कॉर्नर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे बच्चियां बिना हिचक जरूरत की चीजें ले सकें. ये नियम सिर्फ सरकारी स्कूलों के लिए नहीं बल्कि प्राइवेट स्कूलों के लिए भी लागू हैं. अगर जांच में पाया गया कि कोई स्कूल इन बातों को नजरअंदाज कर रहा है, तो शिक्षा विभाग कार्रवाई कर सकता है.

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