वसंत या बसंत पंचमी, क्या है सही? एक पर्व और दो नाम, जानें क्या कहते हैं शास्त्र ?

Vasant Panchami or Basant Panchami: वसंत पंचमी सही है या बसंत पंचमी एक पर्व और दो नाम हिंदू धर्म में कौन सा नाम मान्य है. इस पर्व को इस नाम से जाना जाता है साथ ही इस पर्व के नाम के पीछे क्या कहते हैं हमारे वेद, पुराण और शास्त्र, जानें विस्तार से.

Published by Tavishi Kalra

Vasant Panchami or Basant Panchami: बसंत पंचमी या वसंत पंचमी दोनों ही नाम सही हैं. वसंत नाम से ही बसंत शब्द का विकास हुआ. हिंदी में बसंत शब्द ज्यादा प्रचलित है. जबकि ‘वसंत’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ ऋतु (Spring Season) का  और ‘बसंत पंचमी’ उस ऋतु के आगमन (माघ मास के पांचवें दिन) पर मनाया जाने वाला पर्व है, जिसे सरस्वती पूजा या श्री पंचमी भी कहते हैं.

बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है. इस दिन विद्या, कला, संगीत की देवी मां सरस्वती की अराधना की जाती है. यह दिन प्रकृति के नवीनीकरण का प्रतीक है. शास्त्रों में इसे ऋषि पंचमी भी कहा गया है और यह वसंत के स्वागत का उत्सव है, जिसमें पीले वस्त्र और पीले पकवान महत्वपूर्ण होते हैं. 

दोनों नाम क्यों प्रचलित हैं?

वसंत (Vasant)- वसंत एक संस्कृत शब्द है जो ‘बसंत ऋतु’ (Spring Season) को दर्शाता है. जो भारत की चार प्रमुख ऋतु में से एक है.

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बसंत पंचमी (Basant Panchami)- यह पर्व हिंदू कैलेंडर के 11वें माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला त्योहार है, जो वसंत ऋतु के आगमन की घोषणा करता है. 

आजकल की आम बोलचाल की भाषा में इसे बसंत पंचमी के नाम से बोला जाता है. दोनों ही शब्द एक हैं. वसंत पंचमी ज्यादा शुद्ध और संस्कृत से जुड़ा शब्द है.

वेदों में क्या लिखा है?

  • हिंदू धर्म में चार वेद हैं. अगर हम वेदों की बात करें तो हमारे प्राचीन वेद ऋवेद में वसंत ऋतु का उल्लेख मिलता है.
  • वहीं पुराण में सरस्वती पूजा का संदर्भ मिलता है. इस दिन के बारे में बताया गया है कि सरस्वती जी ने भगवान विष्णु से वरदान प्राप्त किया था कि माघ के महीने में उनकी पूजा होगी.
  • संस्कृत साहित्य में वसंत को ‘ऋतुराज’ (Seasons’ King) कहा गया है, जो प्रकृति में नए जीवन का प्रतीक है.

बसंत पंचमी

बसंत पंचमी जिसे स्प्रिंग या बहार की ऋतु की कहा जाता है. यह पर्व प्रकृति के नवीनीकरण, खेतों में सरसों के पीले फूलों और आम के बौर के साथ, नई ऊर्जा और खुशियों का स्वागत करता है. माना जाता है इस दिन देवी सरस्वती प्रकट हुईं थी. भगवान ब्रह्मा ने जब दुनिया बनाई, तो वे उसमें नीरसता और शांति देखकर परेशान हो गए. उन्होंने अपनी कमंडल से पानी छिड़का, जिससे देवी सरस्वती प्रकट हुईं. देवी ने वीणा बजाकर दुनिया में स्वर, संगीत और ज्ञान भर दिया, इसलिए यह दिन सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है.

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