computer vision syndrome: आज के समय में जब हमारी ज़िंदगी डिजिटल डिवाइसों पर निर्भर होती जा रही है, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल स्क्रीन पर घंटों बिताना आम बात हो गई है. लेकिन लगातार स्क्रीन देखने से हमारी आंखें थक जाती हैं और यह समस्या अब एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता बनती जा रही है. विशेषज्ञ इसे कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम कहते हैं.
कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या है?
कंप्यूटर विजन सिंड्रोम, जिसे डिजिटल आंख थकान भी कहा जाता है, वह स्थिति है जिसमें लंबे समय तक डिजिटल डिवाइसों को देखने से आंखों की मांसपेशियाँ लगातार काम करती हैं और थक जाती हैं. इसका असर सिर्फ आंखों पर नहीं बल्कि पूरे सिर और गर्दन पर भी पड़ता है. इसके मुख्य लक्षण हैं:
लगातार आंखों में जलन या खुजली होना
- चीज़ें धुंधली दिखाई देना
- सिरदर्द या माथे में दर्द
- आंखों का लाल होना
- गले और कंधों में खिंचाव
डॉक्टर्स के अनुसार, यह समस्या केवल वयस्कों में नहीं बल्कि बच्चों और युवाओं में भी बढ़ रही है. मोबाइल और टैबलेट पर लंबे समय तक पढ़ाई या गेम खेलने वाले बच्चों में CVS के लक्षण जल्दी दिखाई देने लगे हैं.
आंखों के लिए कितना हानिकारक है?
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं और आंखों का ब्लिंक रेट कम हो जाता है, जिससे आंखें सूख जाती हैं और उनमें जलन बढ़ती है. यदि इसे अनदेखा किया जाए, तो लंबे समय में यह दृष्टि पर असर डाल सकता है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि डिजिटल आंख थकान से सिर्फ दृष्टि ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि सिरदर्द, गर्दन और कंधों में दर्द जैसी समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं.
आंखों की थकान कम करने के प्रभावी उपाय
- हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज़ को देखें. यह आंखों को आराम देता है और मांसपेशियों को रिलैक्स करता है.
- कंप्यूटर या लैपटॉप स्क्रीन आंखों से लगभग 50–70 सेंटीमीटर दूर रखें. इससे आंखों पर कम दबाव पड़ेगा.
- कमरे की रोशनी और स्क्रीन की चमक का संतुलन बनाए रखें. अत्यधिक चमक या कम रोशनी दोनों ही आंखों को थका सकती हैं.
- समय-समय पर आंखें घुमाना, ऊपर-नीचे देखना या बंद करके आराम देना. इससे आंखों की मांसपेशियाँ रिलैक्स होती हैं.
- कृत्रिम आंख की बूंदों का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से करें, ताकि आंखों की सूखापन और जलन कम हो.
क्या कहते हैं डॉक्टर
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल डिवाइस का समय सीमित करना बेहद जरूरी है. बच्चों और युवाओं में स्क्रीन टाइम कम करना उनकी आंखों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. साथ ही, ऑफिस में काम करने वाले लोगों को नियमित ब्रेक लेने और आंखों की व्यायाम करने की सलाह दी जाती है. डिजिटल युग में आंखों की देखभाल को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए, चाहे आप काम कर रहे हों, पढ़ाई कर रहे हों या मनोरंजन के लिए स्क्रीन देख रहे हों, समय-समय पर आंखों को आराम देना और उचित सावधानियाँ बरतना ज़रूरी है.