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Harish Rana: कौन हैं हरीश राणा, जो अब दुनिया में हैं चंद दिनों के मेहमान; सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सुनाया पैसिव युथनेसिया का फैसला

Harish Rana Euthanasia Case: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में गाजियाबाद के हरीश राणा को पैसिव युथनेसिया (इच्छा मृत्यु) देने पर सहमति दे दी है.

By: JP Yadav | Last Updated: March 11, 2026 12:17:18 PM IST



Harish Rana Euthanasia Case: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में गाजियाबाद के हरीश राणा को पैसिव युथनेसिया (इच्छा मृत्यु) देने पर सहमति दे दी है. इसके बाद डॉक्टरों की निगरानी में उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा सकता है. केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में ही रहकर पढ़ाई कर रहे हरीश वर्ष 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इसके चलते सिर में गंभीर चोट आई और उसके बाद से हरीश लगातार बिस्तर पर हैं. वह 100 प्रतिशत विकलांग हैं. अचेत अवस्था में लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से उनके शरीर में घाव हो गए हैं. एम्स के डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि हरीश राणा अब कभी भी ठीक नहीं हो सकते हैं.  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 मार्च, 2026) को अहम सुनवाई के दौरान फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी. 

क्या है पैसिव यूथेनेशिया (What is Passive Euthanasia)

विशेषज्ञों के अनुसार, पैसिव यूथेनेशिया वह व्यवस्था है, जिसमें किसी गंभीर रूप से बीमार या पूरी तरह से बेहोश रोगी शख्स से जान बचाने वाला मेडिकल इलाज (जैसे, वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब) रोक दिया जाता है या फिर आदेश पर हटा दिया जाता है. इसके बाद बीमार शख्स की प्राकृतिक मौत हो जाती है. जानकारों का कहना है कि पैसिव यूथेनेशिया कानूनी तौर पर एक्टिव यूथेनेशिया (सीधे मारना) से भिन्न है. हमारे देश में इसकी इजाज़त है, लेकिन यह निर्णय सरकार भी नहीं ले  सकती है. इसके लिए कोर्ट का रुख करना पड़ता है. यहां पर बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में इसे इज्ज़त से मरने के अधिकार के तौर पर मान्यता दी थी. 

क्या है पूरा मामला

चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2013 में गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर पडे़ थे. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर अचेत अवस्था में उनका इलाज चला. 13 साल बाद भी उन्हें होश नहीं आया. हरीश 100 प्रतिशत दिव्यांगता हैं और उनके ठीक होने की आशा चुके हरीश के माता-पिता ने ही उसे इच्छा मृत्य देने की मांग की थी. इसके कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.  

 सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने दिल्ली स्थित एम्स से हरीश राणा की मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई थी.एम्स ने कहा था कि हरीश राणा के ठीक होने की उम्मीद नहीं है. माता-पिता की गुजारिश पर हरीश राणा के पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी है. माता-पिता का कहना था कि हरीश पिछले 13 साल से बिस्तर पर अचेत हैं. ऐसे में माता-पिता ने ही उसे इच्छा मृत्य देने की मांग की थी. एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि हरीश कभी ठीक नहीं हो सकता है.लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर में घाव हो गए हैं. 

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