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वैष्णो देवी हादसा: श्राइन बोर्ड ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया, वैष्णो देवी हादसे को बताया ‘अप्रत्याशित बादल फटने की त्रासदी

वैष्णो देवी हादसा: श्री माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बादल फटने से हुए भूस्खलन में 34 तीर्थयात्रियों की मौत और करीब 20 अन्य के घायल होने की घटना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, श्राइन बोर्ड ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। बोर्ड ने इस हादसे को ‘‘अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा’’ बताया जिसे पहले से भांप पाना असंभव था।

Published by Mohammad Nematullah

अजय जंडयाल की रिपोर्ट, वैष्णो देवी हादसा: श्री माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बादल फटने से हुए भूस्खलन में 34 तीर्थयात्रियों की मौत और करीब 20 अन्य के घायल होने की घटना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, श्राइन बोर्ड ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। बोर्ड ने इस हादसे को ‘‘अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा’’ बताया जिसे पहले से भांप पाना असंभव था। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने अपने विस्तृत बयान में कहा कि 26 अगस्त की सुबह मौसम बिल्कुल साफ था और यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी, यहाँ तक कि हेलीकॉप्टर सेवाएँ भी सुचारू रूप से संचालित हो रही थीं। जैसे ही मध्यम बारिश की संभावना का पूर्वानुमान मिला, रजिस्ट्रेशन तुरंत रोक दिए गए और दोपहर 12 बजे तक पुराने मार्ग पर भी यात्रा को स्थगित कर दिया गया।

सुरक्षित जगहों पर रुके थे श्रद्धालु

दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर इंदरप्रस्थ भोजनालय के पास अचानक बादल फटने से 50 मीटर लंबे हिस्से में भारी भूस्खलन हुआ। बोर्ड ने कहा, ‘‘यह स्थान अब तक सबसे सुरक्षित माना जाता रहा है। इस इलाके में पहले कभी भूस्खलन नहीं हुआ था। यह पूरी तरह अप्रत्याशित और अनियंत्रित प्राकृतिक घटना थी, जिसे ‘फोर्स मेज्योर’ कहा जा सकता है।’’ हादसे के बाद श्राइन बोर्ड की डिज़ास्टर मैनेजमेंट टास्क फोर्स, जिला प्रशासन रियासी, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से राहत व बचाव कार्य शुरू किया। 18 घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद श्राइन बोर्ड के काकऱयाल स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि फँसे हुए यात्रियों को शाम तक सुरक्षित कटरा लाया गया।

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रेस्क्यू और राहत कार्य

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि नया तारकोट मार्ग, जो भूस्खलन के लिए अधिक संवेदनशील है, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए 24 अगस्त से ही बंद कर दिया गया था। पुराने मार्ग को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानकर निगरानी में खोला गया था। बोर्ड ने दोहराया कि मौसम पूर्वानुमान के आधार पर हर संभव सावधानी बरती गई थी। हालाँकि, बोर्ड का यह स्पष्टीकरण आलोचना को शांत नहीं कर सका है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उप मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब मौसम को लेकर चेतावनी पहले से थी तो फिर यात्रा को क्यों जारी रखा गया। उमर ने कहा, ‘‘इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, उन्हें इस पर जवाब देना होगा।’’ इधर, कटरा में कई स्थानीय लोगों ने भी श्राइन बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन किया और उस पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।

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