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Delhi Riots Case: क्या शरजील इमाम और उमर खालिद को मिल गई जमानत? सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया फैसला

Delhi Riots Case: इस समय की बड़ी खबर सामने आ रही है. दिल्ली दंगों की साज़िश मामले में SC ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है.

By: Heena Khan | Last Updated: January 5, 2026 11:31:19 AM IST



Delhi Riots Case: इस समय की बड़ी खबर सामने आ रही है. दिल्ली दंगों की साज़िश मामले में SC ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेल की अर्जियों की जांच करते समय उसने जानबूझकर कोई सामूहिक या एक जैसा तरीका अपनाने से परहेज किया है. कोर्ट ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट है कि प्रॉसिक्यूशन के सबूतों से उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके मामले में कानून के तहत ज़रूरी शर्तें पूरी होती हैं और कार्यवाही के इस स्टेज पर उन्हें बेल देना सही नहीं है.

बाकी 5 आरोपियों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रोटेक्टेड गवाहों की जांच पूरी होने के बाद, या इस आदेश की तारीख से एक साल बाद, अपील करने वाले बेल के लिए नया आवेदन देने के लिए आज़ाद होंगे. फैसले के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की जमानत याचिकाएं मंजूर कर लीं हैं.

सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ ?

उनकी ज़मानत की अर्ज़ियों की सुनवाई के दौरान, उनके वकीलों ने ज़्यादातर मामले में देरी और ट्रायल शुरू होने की कम संभावना पर बहस की. कोर्ट को यह भी बताया गया कि वे एक ऐसे मामले में पाँच साल से ज़्यादा समय से हिरासत में हैं, जिसमें उन पर UAPA के तहत अपराध करने के गंभीर आरोप हैं.यह दलीलें भी दी गईं कि हिंसा का कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने दंगे भड़काए थे, जबकि पांच साल बीत चुके हैं.

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि कथित अपराधों में राज्य को अस्थिर करने की जानबूझकर कोशिश की गई थी. उसने तर्क दिया कि ये अचानक हुए विरोध प्रदर्शन नहीं थे, बल्कि “सत्ता परिवर्तन” और “आर्थिक गला घोंटने” के मकसद से एक सोची-समझी “पूरे भारत” की साज़िश थी. दिल्ली पुलिस ने आगे कहा कि यह साज़िश कथित तौर पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के समय की गई थी, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे को वैश्विक बनाना था.

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