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थर्ड AC वाले लोगों को लिमीट से ज्यादा सामान ले जाने पर देना होगा इतना जुर्माना, रेल मंत्री ने रेलवे लगेज पॉलिसी को लेकर दी पूरी जानकारी

अश्विनी वैष्णव ने अब इसको लेकर पूरा सच बताया है। उन्होने इस खबर को गलत और फर्जी बताया है। एक न्यूज़ चैनल में इंटरव्यू के दौरान उन्होने कहा कि रेलवे में सामान को लेकर बताए जा रहे नियम कोई नए नहीं हैं

Published by Divyanshi Singh

Ashwini Vaishnav: हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारतीय रेलवे देश के प्रमुख स्टेशनों पर सामान को लेकर एक नई नीति लागू करने जा रहा है। खबरों में कहा गया था कि यह नई नीति हवाई अड्डों जितनी ही सख्त होगी और यात्रियों को तय सीमा से ज़्यादा सामान ले जाने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

साथ ही, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि रेलवे इस बदलाव से स्टेशनों की आय बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रेलवे सिर्फ़ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा है। आइए जानते हैं कि रेल मंत्री ने सामान नीति की खबरों को लेकर क्या जानकारी दी है।

अश्विनी वैष्णव बताया पूरा सच

अश्विनी वैष्णव ने अब इसको लेकर पूरा सच बताया है। उन्होने इस खबर को गलत और फर्जी बताया है। एक न्यूज़ चैनल में इंटरव्यू के दौरान उन्होने कहा कि रेलवे में सामान को लेकर बताए जा रहे नियम कोई नए नहीं हैं। उन्होने कहा कि ये नियम दशकों से लागू हैं, लेकिन किसी ने पुराने नियमों को ही नई नीति बताकर पेश कर दिया।

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रेलवे में कितना सामानले जा सकते हैं ?

भारतीय रेलवे प्रत्येक यात्री को अपनी यात्रा श्रेणी के अनुसार कुछ मुफ़्त सामान ले जाने की अनुमति देता है। एसी प्रथम श्रेणी के यात्री 70 किलोग्राम तक सामान मुफ़्त ले जा सकते हैं। इसके अलावा, 15 किलोग्राम अतिरिक्त सामान ले जाने की सीमांत छूट है। एसी द्वितीय श्रेणी और प्रथम श्रेणी स्लीपर के यात्रियों को 50 किलोग्राम तक मुफ़्त सामान ले जाने की अनुमति है और अधिकतम सीमा 100 किलोग्राम है।

एसी तृतीय श्रेणी, स्लीपर श्रेणी और चेयर कार में 40 किलोग्राम तक मुफ़्त सामान ले जाने की अनुमति है और 10 किलोग्राम अतिरिक्त सामान ले जाने की अनुमति है। इसके अलावा, सामान्य श्रेणी के यात्रियों को बिना किसी शुल्क के 35 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति है।

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देना पड़ेगा इतना जुर्माना

यदि कोई यात्री निर्धारित सीमा से ज़्यादा सामान ले जाता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। यह जुर्माना उस अतिरिक्त वज़न पर लगाया जाता है और आमतौर पर यह टिकट की दर का 1.5 गुना तक हो सकता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नियम नया नहीं है, बल्कि बहुत लंबे समय से लागू है। कुछ मामलों में यात्रियों को छूट भी मिलती है, लेकिन ऐसा विशेष परिस्थितियों में ही होता है।

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