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LPG Cylinder Crisis: अगर गैस की कमी हुई तो किसे मिलेगा पहले सिलेंडर? भारत सरकार का नियम जान लें

LPG Cylinder Crisis | LPG Crisis | ESMA on LPG supply: ईरान-इजराइल में बढ़ते तनाव के बाद भारत को भी कई तरह की परेशनियों का सामना करना पड़ा था. ईरान-US-इज़राइल में चल रहे तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है, जिससे LPG और नैचुरल गैस की सप्लाई काफी हद तक कम हो गई है.

By: Heena Khan | Last Updated: March 10, 2026 1:11:02 PM IST



LPG Cylinder Crisis | LPG Crisis | ESMA on LPG supply: ईरान-इजराइल में बढ़ते तनाव के बाद भारत को भी कई तरह की परेशनियों का सामना करना पड़ा था. ईरान-US-इज़राइल में चल रहे तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है, जिससे LPG और नैचुरल गैस की सप्लाई काफी हद तक कम हो गई है.  इस किल्लत को देखते हुए भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने नैचुरल गैस के बंटवारे के लिए एक साफ़ प्रायोरिटी लिस्ट जारी की है. गैस की कमी होने पर, अब यह तय किया गया है कि किस सेक्टर को सबसे ज़्यादा गैस दी जाएगी.

किस सेक्टर को मिलेगी गैस 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार का कहनाहै कि घरेलू यूज़र्स और ज़रूरी सेक्टर्स को किसी भी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसलिए, उन्हें 100% सप्लाई मिलेगी, यानी कोई कटौती नहीं होगी. इनमें ये मुख्य सेक्टर शामिल हैं.

  • पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG): पाइप के ज़रिए सीधे घरों में सप्लाई की जाने वाली गैस, जिसका इस्तेमाल खाना पकाने में होता है.
  • CNG: गाड़ियों, ऑटोमोबाइल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए कम्प्रेस्ड नैचुरल गैस.
  • LPG प्रोडक्शन: घरेलू कुकिंग गैस सिलेंडर बनाने में इस्तेमाल होने वाली गैस.
  • पाइपलाइन चलाने के लिए ज़रूरी फ्यूल: गैस ट्रांसपोर्ट करने में इस्तेमाल होने वाली गैस.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये सेक्टर आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का काफी अहम हिस्सा हैं, इसलिए सरकार ने इन्हें सबसे ज़्यादा प्रायोरिटी दी है. वहीं घरेलू PNG और CNG को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा ताकि लोगों को खाना बनाने या गाड़ी चलाने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो.

कहाँ होगी गैस की कटौती ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार का कहना है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर का हिस्सा कम किया जाएगा. साथ ही उन्हें उनके पिछले औसत इस्तेमाल के आधार पर कम गैस दी जाएगी. इसका मतलब है कि एक कंपनी को पिछले कुछ महीनों में उसके गैस इस्तेमाल का एक परसेंटेज मिलेगा. जी हाँ, कहीं न कहीं इस खबर के बाद व्यापारियों को झटका लगेगा लेकिन जहां गैस ज़रूरी है वहीं ज्यादा सप्लाई की अनुमति दी जाएगी.

  • चाय इंडस्ट्री और दूसरे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: पिछले छह महीनों के औसत इस्तेमाल का सिर्फ़ 80%.
  • फर्टिलाइज़र कंपनियाँ: 70% हिस्सा
  • ऑयल रिफाइनरियाँ: 65% हिस्सा.

आखिर सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला 

जानकारी के मुताबिक सरकार को ये फैसला इसलिए लेना पड़ा है क्योंकि भारत अपनी LPG ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है, ज़्यादातर मिडिल ईस्ट से होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए. युद्ध की वजह से इम्पोर्ट रुक गया है, जिससे कमर्शियल LPG की पहले से ही कमी हो गई है. घरेलू LPG बचाने के लिए, सरकार ने रिफाइनरियों को प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश दिया है और स्टॉक बचाने के लिए घरेलू सिलेंडर के लिए बुकिंग का समय 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है.

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