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पानी के नीचे एक ही सुरंग में चलेंगी बस और ट्रेन? भारत की इस पहली ट्विन-ट्यूब अंडरवाटर टनल से जुड़े 15 सवालों के जवाब जानें

ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे भारत का अद्भुत कारनामा! एक ही टनल में ऊपर बस और नीचे ट्रेन? जानिए इस ऐतिहासिक ट्विन-ट्यूब टनल से जुड़े वो 15 सच, जो हर भारतीय को जानना चाहिए.

By: Shivani Singh | Published: January 7, 2026 2:57:38 PM IST



ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली भारत की पहली ट्विन-ट्यूब अंडरवाटर रेल-रोड टनल इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना है। ₹18,600 करोड़ की यह परियोजना असम के गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़कर उत्तर-पूर्व में सैन्य और नागरिक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, जो भारत की सुरक्षा के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी। आइये इनसे जुड़े कुछ सवालों के जवाब जानते हैं.

Q1. भारत की पहली ट्विन-ट्यूब अंडरवाटर टनल रणनीतिक गेम-चेंजर क्यों है?

यह सुरंग चीन सीमा के पास अरुणाचल प्रदेश तक हर मौसम में सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करेगी। यह युद्ध जैसी स्थिति में ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर बने पुलों पर निर्भरता खत्म कर एक सुरक्षित अंडरग्राउंड रास्ता प्रदान करेगी.

Q2. 15.8 किमी की टनल सैन्य गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स को कैसे बढ़ावा देगी?

यह भारी टैंकों, मिसाइलों और सैनिकों को नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक बिना देरी के पहुँचाने में मदद करेगी. इससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, जिससे आपातकाल में रसद की आपूर्ति तेजी से हो सकेगी.

Q3. यह टनल कहाँ बन रही है और असम इसके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है. असम उत्तर-पूर्व का केंद्र है, इसलिए यहाँ से अरुणाचल और अन्य सीमावर्ती राज्यों तक रसद पहुँचाना सबसे आसान है.

Q4. गोहपुर और नुमालीगढ़ को ही क्यों चुना गया?

नुमालीगढ़ में बड़ी तेल रिफाइनरी है और गोहपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है, जिससे यह मार्ग आर्थिक और सैन्य दृष्टि से सबसे छोटा और महत्वपूर्ण लिंक बन जाता है.

Q5. एक ही सुरंग में वाहन और ट्रेनें कैसे चलेंगी?

इस ट्विन-ट्यूब डिजाइन में दो अलग-अलग सुरंगे होंगी. प्रत्येक सुरंग के भीतर दो स्तर (Levels) होंगे: ऊपरी हिस्से पर गाड़ियाँ चलेंगी और निचले हिस्से में रेलवे ट्रैक होगा.

Q6. ट्रेन चलने पर सड़क यातायात का क्या होगा?

चूंकि ट्रेन और गाड़ियाँ अलग-अलग स्तरों (Vertical segregation) पर चलेंगी, इसलिए रेल के आने-जाने से सड़क यातायात पर कोई असर नहीं पड़ेगा और दोनों एक साथ चलते रहेंगे.

Q7. टनल के भीतर ट्रेनें केवल बिजली से क्यों चलेंगी?

सुरंग के अंदर डीजल इंजन के धुएं से ऑक्सीजन की कमी और दम घुटने का खतरा हो सकता है। बिजली से चलने वाली ट्रेनें प्रदूषण मुक्त होती हैं, जिससे टनल के भीतर हवा साफ रहती है।

Q8. बैलास्टलेस ट्रैक क्या है और इसके क्या फायदे हैं?

बैलास्टलेस ट्रैक में पत्थरों के बजाय कंक्रीट के स्लैब का उपयोग होता है। यह ट्रैक सुरंग के भीतर ट्रेन को अधिक स्थिरता देता है, जिससे ट्रेनें बिना फिसले बहुत तेज़ गति से चल सकती हैं।

Q9. यह सुरंग भारत की रक्षा तैयारियों को कैसे मजबूत करेगी?

यह दुश्मन की निगरानी और हवाई हमलों से बचकर सेना की आवाजाही को गुप्त और सुरक्षित रखेगी. यह साल के 12 महीने और हर तरह के मौसम में सेना के लिए एक बैकअप मार्ग की तरह काम करेगी.

Q10. क्या यह वाकई आपात स्थिति में सेना को तेजी से पहुंचा सकती है?

हाँ, यह टनल वर्तमान पुलों के मुकाबले मार्ग को काफी छोटा कर देती है, जिससे सेना का मूवमेंट घंटों के बजाय मिनटों में संभव हो जाएगा.

Q11. प्रोजेक्ट की कुल लंबाई कितनी है और इसमें टनल के अलावा क्या शामिल है?

पूरी परियोजना 33.7 किमी लंबी है. इसमें 15.8 किमी की मुख्य टनल के साथ-साथ उसे नेशनल हाईवे से जोड़ने वाली एप्रोच सड़कें, सुरक्षा चौकियां और ड्रेनेज सिस्टम शामिल हैं.

Q12. इसकी लागत ₹18,600 करोड़ क्यों है और क्या यह निवेश सही है?

नदी के नीचे इतनी गहरी सुरंग बनाना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा है. देश की सुरक्षा और उत्तर-पूर्व के विकास को देखते हुए यह निवेश भविष्य के लिए बेहद जरूरी और फायदेमंद है.

Q13. इसे भारतीय बुनियादी ढांचे में ‘पहली बार’ क्यों कहा जा रहा है?

भारत ने पहले कभी नदी के नीचे इतनी लंबी ट्विन-ट्यूब रेल-रोड सुरंग नहीं बनाई है. यह पहली बार है जब ट्रेन और कारें एक साथ पानी के नीचे से गुजरेंगी, जो इसे इंजीनियरिंग का अजूबा बनाता है.

Q14. यह टनल उत्तर-पूर्व के भविष्य को कैसे बदलेगी?

यह रेल, सड़क और रक्षा तीनों क्षेत्रों में क्रांति लाएगी, जिससे स्थानीय व्यापार बढ़ेगा और सीमा सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी.

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