Cyber Fraud in India: भारत में पिछले कुछ सालों में साइबर अपराधों के मामलों में ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में साइबर अपराध की घटना को लेकर देश की अर्थव्यवस्था पर भी अच्छा-खासा असर देखने को मिला है. जहां कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, पिछे कुछ सालों में कई प्रकार के साइबर अपराध की वजह से अनुमानित नुकसान 5 लाख 29 हजार 760 करोड़ तक का आकंड़ा पहुंच चुका है.
तो वहीं, दूसरी तरफ गृह मंत्रालय (MHA) के तहत काम करने वाले सभी ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) ने चेतावनी दी है कि इस अपराध का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से पूरी तरह से संचालित किया जा रहा है. इसके साथ ही खास रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरीके अपनाकर अपराधी लोगों को डरा धमाकर करोड़ों की ठगी की वारदात को अंजाम देने में जुटे हुए हैं.
नुकसान का भयावह आंकड़ा
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साइबर धोखाधड़ी अब सिर्फ छोटे-मोटे फिशिंग तक ही केवल सीमित नहीं रही है, बल्कि पिछले साल 2025 और साल 2024 के दौरान साइबर अपराधों के मामलों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला है. तो वहीं, दूसरी तरफ कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, अगर सभी प्रकार के संगठित साइबर अपराधों को जोड़ने की पूरी तरह से कोशिश की जाए, तो दरअसल यह आंकड़े 5.3 लाख करोड़ के करीब भी पहुंच सकता है. इसके अलावा साल 2024 में रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी पिछले साल की तुलना में 206 प्रतिशत से ज्यादा थी.
‘डिजिटल अरेस्ट’ का बढ़ा खतरा
तो वहीं, दूसरी तरफ पिछले 6 सालों में साइबर अपराधियों ने तकनीकी रूप से खुद को बहुत उन्नत किया है. इनमें सबसे खतरनाक ट्रेंड ‘डिजिटल अरेस्ट’ को सबसे पहले शामिल किया गया है. अपराधी खुद को CBI, NCB या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करके बड़ी से बड़ी वारदातों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं. इसके साथ ही वे फर्जी वारंट दिखाकर पीड़ित को घर में ही कैद रहने के साथ-साथ कैमरा नहीं हटाने की भी धमकी देने का काम करते हैं.
इतना ही नहीं, साल 2024 में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के मामले में 1.2 लाख से ज्यादा के मुकदमे को दर्ज कर कार्रवाई की थी. इसके साथ ही डरे हुए लोग अपनी जीवन भर की कमाई इन ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं.
गृह मंत्रालय ने कहां तक की कार्रवाई?
भारत सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं.
I4C और 1930 हेल्पलाइन
तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन और ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ को लगातार मजबूत किया जा रहा है.
सिम और डिवाइस ब्लॉकिंग
तो वहीं, धोखाधड़ी के मामले में शामिल 9.4 लाख से ज्यादा सिम कार्ड और 2.6 लाख से ज्यादा मोबाइल (IMEI) ब्लॉक करने में पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है.
म्यूल अकाउंट पर कसा शिकंजा
संदिग्ध लेनदेन वाले लगभग 24 लाख बैंक खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया की शुरुआत की गई है. तो वहीं, गृह मंत्रालय ने साफ-साफ शब्दों में यह कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए ‘अरेस्ट’ नहीं कर पाती है. ऐसे किसी भी कॉल पर तुरंत संपर्ट काटें और तुरंत ही बिना किसी देर के 1930 कॉल करें जानकारी दें.