Animal Lover: दान अमीरों के लिए है. अगर पूरी दुनिया इसी पॉलिसी पर चले, तो ज़रूरतमंदों पर दया दिखाने वाले बहुत कम लोग होंगे. जो लोग हर महीने फिक्स्ड सैलरी पाते हैं या जिन पर बहुत सारी ज़िम्मेदारियाँ हैं, उन्हें इस स्विगी डिलीवरी एजेंट की कहानी पढ़नी चाहिए जो अपना समय नौकरी करने और दूसरों की मदद करने में बाँटता है. और उसकी कहानी यह एहसास कराती है कि संसाधनों से ज़्यादा इरादा ज़रूरी है. आकाश सरोज एक 24 साल का डिलीवरी एजेंट है जिसने अपनी दयालुता के छोटे-छोटे कामों से ऑनलाइन बहुत इज़्ज़त कमाई है. उसके पास देने के लिए हज़ारों रुपये नहीं हैं और वो अपने परिवार के लिए पैसे कमाने के लिए घंटों सड़क पर बिताता है, फिर भी वो अपने कामों में दरियादिल है.
कमाई का एक हिस्सा करता है दान
वो अपनी कमाई का कुछ हिस्सा जानवरों के लिए खाना खरीदने के लिए अलग रखता है और अपने डिलीवरी रूट पर उन लोगों पर नज़र रखता है जिन्हें मदद की ज़रूरत हो सकती है. एक रिक्शावाले को खाना खिलाने और उसकी टूटी हुई गाड़ी ठीक करवाने से लेकर फुटपाथ पर सोने वालों को कंबल बाँटने तक, आकाश की सोच देखकर हैरानी होती है कि वो सीमित इनकम और परिवार की ज़िम्मेदारियों के बावजूद यह सब कैसे मैनेज करता है.
क्या कहता है आकाश ?
आकाश कहते हैं, “डिलीवरी एजेंट के तौर पर ज़िंदगी बहुत मुश्किल है. लगातार प्रेशर रहता है, और खाने या आराम करने का मुश्किल से ही समय मिलता है. लगातार कॉल आते रहते हैं, और काम बाकी सब चीज़ों से ज़्यादा ज़रूरी होता है क्योंकि ज़िंदगी उसी पर निर्भर करती है.” तो लोगों की मदद करने के लिए उन्हें पैसे कहाँ से मिलते हैं? “मैं जो भी कमाता हूँ, उसमें से जितना हो सके उतना मैनेज करने की कोशिश करता हूँ. मैं सोशल मीडिया पर पोस्ट करता रहता हूँ, लेकिन वहाँ से मुझे कुछ भी कमाई नहीं होती. मेरे पास ज़्यादातर कोलैबोरेशन के ऑफर गैंबलिंग या बेटिंग ऐप्स से जुड़े होते हैं, जिन्हें मैं प्रमोट नहीं करना चाहता. मैं पैसे के लिए लोगों को गुमराह नहीं करना चाहता.” आकाश कहते हैं कि उन्होंने दयालुता अपने पिता से सीखी, जो एक मज़दूर थे, लेकिन 2024 में एक छोटी सी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया.

