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Chhattisgarh News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा, रायपुर में जल्द लागू होगी पुलिस कमिश्नर प्रणाली

Chhattisgarh News: आख़िर क्यो इसकी जरूरत आन पड़ी, गौरतलब है की पूर्व डीजीपी डीएम अवस्थी के समय ही इसकी कवायद शुरू कर दी गई थी, क्योकि जिस तेजी से शहर बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से क्राइम का ग्राफ भी बढ़ रहा है |

Published by Mohammad Nematullah

दीपक विश्वकर्मा की रिपोर्ट, Chhattisgarh News: आख़िर क्यो इसकी जरूरत आन पड़ी, गौरतलब है की पूर्व डीजीपी डीएम अवस्थी के समय ही इसकी कवायद शुरू कर दी गई थी, क्योकि जिस तेजी से शहर बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से क्राइम का ग्राफ भी बढ़ रहा है, बीते दिनों रायपुर और उससे सटे जिलों में क्राइम के बाद जिस तरह की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई उसकी चर्चा पूरे देश में हुई, लंबित पड़ा साय सरकार का ये फैसला कितना कारगर होगा ये तो भविष्य बताएगा।

आइए समझते है पुलिस कमिश्नर प्रणाली को

पुलिस कमिश्नर प्रणाली में, पुलिस कमिश्नर के पास दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत कई अधिकार आ जाते हैं, और वह जिले के कानून और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होता है। इस प्रणाली में, पुलिस आयुक्त को मजिस्ट्रेट के अधिकार भी प्राप्त होते हैं, जिससे वह आपराधिक मामलों में त्वरित निर्णय ले सकता है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।

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पुलिस कमिश्नर प्रणाली के मुख्य पहलू

  • पुलिस कमिश्नर को सीआरपीसी अधिकार                                                                           
  • लाइसेंस जारी करना (शस्त्र, होटल, आदि)
  • धरना, प्रदर्शन की अनुमति देना या न देनाः बल प्रयोग का निर्णय लेना
  • रासुका या गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करना
  • निर्णय लेने की गति
  • गिरफ्तारी वारंट जारी करना

यह प्रणाली निर्णय लेने की गति को तेज करती है, क्योंकि पुलिस कमिश्नर को डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) जैसे अधिकारियों की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है।

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आपराधिक मामलों में त्वरित कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर के पास आपराधिक मामलों में त्वरित कार्रवाई करने की शक्ति होती है, जिससे अपराधों को रोकने और अपराधियों को पकड़ने में मदद मिलती है। कमिश्नर प्रणाली में, पुलिस कमिश्नर राज्य सरकार के प्रति जवाबदेह होता है, और उसे अपने क्षेत्र में कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। कमिश्नर प्रणाली में, पुलिस और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, जिससे कानून व्यवस्था बनाए रखने में आसानी होती है।

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कहा कहा लागू है ये प्रणाली

पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली देश के कई राज्यों के प्रमुख शहरों और जिलों में लागू है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जबलपुर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे, कानपुर, लखनऊ, नोएडा, वाराणसी, आगरा, प्रयागराज, और गाजियाबाद शामिल है। यह प्रणाली, उन क्षेत्रों में लागू होती है जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अधिक शक्तियां दी जाती हैं। इसके तहत, पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) के पास मजिस्ट्रेट के अधिकार भी होते हैं, जिससे वह बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के त्वरित निर्णय ले सकता है।आर्थिक राजधानी मुंबई में, पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) और महाराष्ट्र के DGP, दोनों ही DG रैंक के अधिकारी हैं, लेकिन वे अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं और अलग-अलग अधिकारियों को रिपोर्ट करते हैं, वही देश की राजधानी दिल्ली में, पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) पूरे दिल्ली पुलिस बल का प्रमुख होता है, जो कि एक DGP रैंक का अधिकारी होता है, कुल मिलाकर, पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली भारत के कई प्रमुख शहरों और जिलों में कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गई है

Mohammad Nematullah
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