Economic survey: मोबाइल बना बच्चों के लिए साइलेंट किलर! ब्रेन वॉश करने वाली रील्स-शॉर्ट्स पर सरकार लगाएगी लगाम, इकनोमिक सर्वे में खुलासा

Economic Survey 2026: भारत सरकार ने 2026 के बजट में संकेत दिया है कि वो बच्चों में 'डिजिटल एडिक्शन' की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाएगी.

Published by Heena Khan

Budget 2026: आज के दौर में मोबाइल फोन बच्चों के लिए ‘बेसिक नीड’ बन गया है. आप बड़ी ही आसानी से अपने बच्चों को बेहला सकते हैं. जिसके चलते बच्चों के थोड़ी सी ही जिद करने पर आप उनक हाथ म मोबाइल देकर उन्हें बेहला लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कितना खतरनाक है. दिनभर बच्चे फोन लेकर रील्स और शॉर्ट्स देखते रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वो इस वीडियो में क्या देख रहे हैं और ये वीडियो उन्हें मानसिक रूप से कितना कमजोर बना रही हैं. लेकिन अब इस मामले को लेकर सरकार भी अलर्ट हो गई है.अब सरकार इस चिंता को कानूनी तौर पर दूर करने जा रही है. भारत सरकार ने Budget 2026 में संकेत दिया है कि वो बच्चों में ‘डिजिटल एडिक्शन’ की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाएगी.

सोशल मीडिया पर होगी उम्र की सीमा तय

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल के 2026 के Economic Survey 2026 में न सिर्फ GDP और फाइनेंशियल डेटा पर बात की गई है, बल्कि देश की आने वाली पीढ़ी, यानी बच्चों की मेंटल हेल्थ पर भी अच्छी खासी चर्चा और सर्वे हुआ है. इतना ही नहीं इस सर्वे में सोशल मीडिया के नेगेटिव असर पर भी गहरी चिंता जताई गई है. सरकार ने सुझाव दिया है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए उम्र की सीमा तय करना ज़रूरी होना चाहिए. इस साल के इकोनॉमिक सर्वे में साफ तौर पर कहा गया है कि कम उम्र में बिना फिल्टर वाले कंटेंट तक पहुंच बच्चों के व्यवहार, एकाग्रता और जीवन के लक्ष्यों पर असर डाल रही है.

Economic Survey 2026 की सिफारिशें : आपको बता दें, ये वो सिफारिशें हैं जो इंटरनेट की दुनिया को पूरी तरह से बदल देंगी. इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए तीन अहम गाइडलाइंस का सुझाव दिया है:

सख्त उम्र की पुष्टि: सोशल मीडिया कंपनियों को यह पक्का करना होगा कि एक तय उम्र (शायद 13 या 15 साल) से कम उम्र के बच्चे इन ऐप्स का इस्तेमाल न कर सकें.

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डिफ़ॉल्ट सेफ़ सेटिंग्स: अगर कोई टीनएजर सोशल मीडिया इस्तेमाल करता है, तो उसके ऐप की सेटिंग्स डिफ़ॉल्ट रूप से ‘प्राइवेसी-फर्स्ट’ होनी चाहिए, और इन सेटिंग्स को बच्चा आसानी से बदल न सके.

एल्गोरिदम में बदलाव: प्लेटफ़ॉर्म को ऐसे एल्गोरिदम बनाने होंगे जो बच्चों को हिंसक, आपत्तिजनक या चिंता पैदा करने वाले कंटेंट से बचा सकें.

माता-पिता का अहम रोल

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे गलत उम्र बताकर अकाउंट बना लेते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए, स्कूलों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना और माता-पिता का घर पर स्क्रीन टाइम के बारे में सख्त नियम बनाना बेहद अहम है . लेकिन, ज़्यादा सख़्ती बच्चों को अनजान या डार्क वेब ऐप्स की तरफ धकेल सकती है, इसलिए विशेषज्ञ संतुलित तरीका अपनाने की सलाह देते हैं. ऐसे में माता-पिता को न ज्यादा सख्ती करनी और ना ही बहुत नरम तरीके से पेश आना. धीरे धीरे करके बच्चों की इस आदत को छुड़वाना है. 

Economic Survey 2026: इकोनॉमिक सर्वे की सालाना रिपोर्ट से बजट पर क्या पड़ेगा असर?

Heena Khan

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