महाराष्ट्र नगर परिषद चुनावों में एक अप्रत्याशित घटना हुई. बीजेपी और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया. यह मामला ठाणे की अंबरनाथ नगर परिषद में मेयर के चुनाव से जुड़ा था. किसी भी पार्टी के पास अकेले मेयर चुनने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी. इस वजह से बीजेपी और कांग्रेस को हाथ मिलाना पड़ा. मेयर बीजेपी का था. खास बात यह है कि इस गठबंधन में शिवसेना (शिंदे गुट) को शामिल नहीं किया गया था.
बीजेपी, कांग्रेस या AIMIM के साथ गठबंधन नहीं कर सकती
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. फडणवीस ने कहा कि यह गठबंधन स्थानीय स्तर पर हुआ था और नेताओं ने पार्टी संगठन से अनुमति नहीं ली थी. बीजेपी कभी भी कांग्रेस या AIMIM के साथ गठबंधन नहीं कर सकती. ऐसे गठबंधन बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. इसमें शामिल नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अगर स्थानीय बीजेपी नेताओं ने बिना अनुमति के इन पार्टियों के साथ गठबंधन किया है, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा. दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी 12 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है
क्या था समीकरण?
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में 16 बीजेपी पार्षद, 12 कांग्रेस पार्षद और 4 NCP पार्षद एक साथ आए. कुल संख्या 32 हो गई, जो मेयर चुनने के लिए काफी थी. बीजेपी की तेजश्री करंजुले मेयर बनीं.
बीजेपी ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा
शिवसेना शिंदे गुट के विधायक बालाजी किंकर ने इस बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन को अनैतिक बताया. उन्होंने बीजेपी पर धोखे का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जो लोग कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करते हैं, वे अब कांग्रेस के साथ सत्ता में बैठे हैं। ऐसा करके उन्होंने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है.
दूसरी ओर, बीजेपी का कहना है कि उन्होंने शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ गठबंधन करने की कोशिश की थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. नगर पंचायत और नगर निगम चुनावों में अक्सर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, जहां लोग पार्टी लाइन की परवाह किए बिना उम्मीदवारों का समर्थन या विरोध करते हैं. फिर भी, देश की सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी पार्टी के बीच किसी भी तरह का गठबंधन निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है.