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इटली के इस गांव में 30 साल बाद पैदा हुआ बच्चा, उससे पहले बिल्लियों का था राज..!

इटली के एक छोटे गांव में इंसानों से ज्यादा बिल्लियां रहती हैं. घटती आबादी और पलायन से गांव सूना हो गया था, लेकिन कई साल बाद एक बच्चे के जन्म ने नई उम्मीद जगा दी.

Published by sanskritij jaipuria

हमारे यहां कई जगहों पर बिल्ली को लेकर तरह-तरह की मान्यताएं हैं. कहीं उसे अशुभ माना जाता है, तो कहीं उससे दूरी बनाई जाती है. लेकिन कुछ देशों में बिल्लियां घर के सदस्य जैसी होती हैं. इटली में एक ऐसा ही छोटा सा गांव है, जहां बिल्लियों की संख्या इंसानों से ज्यादा हो गई है. ये कहानी थोड़ी अलग और सोचने पर मजबूर करने वाली है.

इटली के अब्रूजो इलाके में पहाड़ों के बीच एक छोटा सा गांव है. यहां पुराने पत्थर के घर, पतली गलियां और बहुत कम लोग रह गए हैं. समय के साथ गांव की आबादी घटती चली गई. कई घर खाली हो गए और गलियां पहले से ज्यादा शांत हो गईं.

बिल्लियों की बढ़ती संख्या

जैसे-जैसे लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर जाते गए, बिल्लियां यहां बसती चली गईं. ये बिल्लियां बेखौफ होकर घरों के बाहर घूमती हैं, दीवारों पर आराम करती हैं और गलियों में दिखाई देती हैं. अब गांव में इंसानों से ज्यादा बिल्लियां नजर आती हैं, मानो पूरा इलाका उन्हीं का हो.

कम होते लोग, बढ़ती खामोशी

पिछले कई सालों से इस गांव में बहुत कम बदलाव हुआ है. युवा लोग काम और बेहतर जीवन की तलाश में बाहर चले गए. स्कूलों में बच्चे नहीं रहे और बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ती चली गई. लंबे समय तक यहां किसी बच्चे की किलकारी सुनाई नहीं दी.

 लगभग 30 सालों से यहां कोई बच्चा नहीं हुआ और अब मार्च में एक बच्चे ने जन्म लिया है. तो ये सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए खुशी की बात बन गया. लोगों को लगा कि शायद अब गांव फिर से जीवंत हो सके. लंबे समय बाद किसी घर में नई शुरुआत हुई.

पूरे इटली की तस्वीर

ये गांव अकेला नहीं है. इटली के कई हिस्सों में आबादी कम हो रही है और जन्म दर लगातार गिर रही है. छोटे गांव खाली होते जा रहे हैं और वहां जीवन धीमा पड़ता जा रहा है. ये समस्या पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन चुकी है.

स्थानीय प्रशासन की उम्मीद

गांव के स्थानीय अधिकारी मानते हैं कि यहां कई पीढ़ियां धीरे-धीरे खत्म होती चली गईं. फिर भी उन्हें उम्मीद है कि नए बच्चे के आने से शायद कुछ परिवार वापस लौटें या नए लोग यहां आकर बसें. हालांकि वे ये भी स्वीकार करते हैं कि आज के समय में गांव में बसना आसान फैसला नहीं है.

ये गांव आज भी बिल्लियों की म्याऊं से गूंजता है, लेकिन अब उसमें एक बच्चे की हंसी भी जुड़ गई है. ये कहानी सिर्फ बिल्लियों की नहीं, बल्कि बदलते समय, खाली होते गांवों और नई उम्मीद की है.

sanskritij jaipuria

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