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Womens health: 30 की उम्र पार करते ही महिलाओं में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, कराएं ये 5 जरूरी टेस्ट

Womens health checkup: 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिससे कुछ बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना बेहद जरूरी है.

By: Ranjana Sharma | Published: March 8, 2026 4:17:47 PM IST



Womens health checkup: 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल, शारीरिक और मानसिक बदलाव होने लगते हैं. बदलती जीवनशैली, काम का तनाव, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हो जाती है.डॉक्टरों के अनुसार समय-समय पर कराई गई जांच न केवल बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद करती है, बल्कि इलाज को भी आसान बना देती है. खासकर कैंसर, हृदय रोग, थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं की पहचान समय रहते करना बेहद महत्वपूर्ण है.

पैप स्मीयर और पेल्विक टेस्ट

30 साल के बाद महिलाओं के लिए पैप स्मीयर और पेल्विक टेस्ट बेहद जरूरी माने जाते हैं. पैप स्मीयर टेस्ट के जरिए गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है. वहीं पेल्विक टेस्ट में डॉक्टर गर्भाशय, अंडाशय और अन्य प्रजनन अंगों की स्थिति की जांच करते हैं. डाक्टर्स के अनुसार 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को हर तीन साल में कम से कम एक बार पैप स्मीयर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए. इससे सर्वाइकल कैंसर के जोखिम का समय रहते पता चल सकता है.

थायरॉइड टेस्ट

थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है. यदि थायरॉइड हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाए तो वजन बढ़ना, बाल झड़ना, थकान, मूड स्विंग और मासिक धर्म में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए 30 वर्ष के बाद महिलाओं को साल में कम से कम एक बार थायरॉइड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए. इस जांच में टी3, टी4 और टीएसएच हार्मोन के स्तर की जांच की जाती है, जिससे थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है.

मैमोग्राम

स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसरों में से एक माना जाता है. मैमोग्राम एक विशेष एक्स-रे जांच है, जो स्तनों में किसी भी असामान्य गांठ या बदलाव का पता लगाने में मदद करती है. हालांकि सामान्य तौर पर यह जांच 40 साल के बाद नियमित रूप से कराने की सलाह दी जाती है, लेकिन अगर परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास हो तो डॉक्टर 30 साल के बाद भी इसकी सलाह दे सकते हैं.

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की जांच की जाती है. यह जांच हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. 30 वर्ष के बाद शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए इस उम्र के बाद समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाना जरूरी होता है.

ब्लड प्रेशर जांच

ब्लड प्रेशर की नियमित जांच भी 30 वर्ष के बाद बेहद जरूरी मानी जाती है. उच्च रक्तचाप को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि कई बार इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन यह धीरे-धीरे दिल, किडनी और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है. डॉक्टरों के अनुसार हर छह महीने में एक बार ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करानी चाहिए. खासकर उन महिलाओं को अधिक सतर्क रहना चाहिए जिनके परिवार में हृदय रोग या हाई ब्लड प्रेशर का इतिहास रहा हो.

समय पर जांच से मिलती है सुरक्षा

डॉक्टरों का कहना है कि 30 वर्ष की आयु के बाद स्वास्थ्य जांच को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है. पैप स्मीयर, थायरॉइड टेस्ट, मैमोग्राम, लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर जांच जैसे टेस्ट कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में पकड़ने में मदद करते हैं. नियमित जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम से महिलाएं लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकती हैं.

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