Home > हेल्थ > सावधान! दाल खाना पड़ सकता है भारी! नुकसान जानकर उड़ जाएंगे होश, जानें कौन-कौन सी दालें बेहतर

सावधान! दाल खाना पड़ सकता है भारी! नुकसान जानकर उड़ जाएंगे होश, जानें कौन-कौन सी दालें बेहतर

Causes of Bloating: दाल! ये वो पकवान है जिसे हर भारतीय बड़ी चाओ से खाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय खाने में दाल, राजमा और छोले जैसे खाने की चीज़ों को हेल्दी डाइट के तौर पर देखा जाता है.

By: Heena Khan | Published: January 13, 2026 11:04:57 AM IST



Causes of Bloating: दाल! ये वो पकवान है जिसे हर भारतीय बड़ी चाओ से खाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय खाने में दाल, राजमा और छोले जैसे खाने की चीज़ों को हेल्दी डाइट के तौर पर देखा जाता है. बचपन से ही हमें ये सिखाया जाता है कि इनमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है और ये रोज़ के खाने के लिए काफी जरूरी होता है. लेकिन, सच्चाई यह है कि इन्हें खाने के बाद कई लोगों को पेट फूलना, गैस, एसिडिटी और भारीपन जैसी दिक्कतें होती हैं. ऐसे मामलों में, लोग अक्सर दालों को ही दोष देते हैं और मान लेते हैं कि उनका डाइजेस्टिव सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है, या यह खाना उनके शरीर को सूट नहीं करता. न्यूट्रिशनिस्ट निकिता बर्दिया के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि दालें आपके लिए खराब हैं; बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आपका डाइजेस्टिव सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है.

दाल फायदेमंद या नुकसानदायक 

दालें भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हैं. इनमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई ज़रूरी पोषक तत्व होते हैं. लेकिन हर दाल हर किसी के पेट को सूट करे, यह ज़रूरी नहीं. कुछ दालें पचाने में आसान होती हैं, जबकि कुछ दालें गैस, पेट फूलने और बेचैनी का कारण बन सकती हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कौन-सी दालें पेट के लिए हल्की होती हैं और किन दालों से परेशानी हो सकती है.

पेट के लिए सबसे आसान दालें 

मूंग दाल को सबसे हल्की और सुपाच्य दाल माना जाता है. यह जल्दी पच जाती है और इससे गैस बहुत कम बनती है. बीमार व्यक्ति, बच्चे और बुज़ुर्गों के लिए मूंग दाल बहुत अच्छी मानी जाती है. मसूर दाल भी पचाने में आसान होती है, खासकर जब इसे छिलका हटाकर पकाया जाए. इसमें फाइबर संतुलित मात्रा में होता है, जिससे पेट साफ रहता है. अरहर (तूर) दाल ठीक से पकाई जाए तो यह भी ज़्यादातर लोगों को सूट करती है. इसमें प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है और यह रोज़ाना खाने के लिए ठीक मानी जाती है. चना दाल (पतली या अच्छी तरह गली हुई) सीमित मात्रा में ली जाए तो यह भी पेट पर ज़्यादा बोझ नहीं डालती.

ये दालें नुकसानदायक 

काबुली चना और काले चने भारी होते हैं और इनमें फाइबर बहुत ज़्यादा होता है. अगर इन्हें सही तरीके से न भिगोया जाए या ज़्यादा मात्रा में खा लिया जाए, तो गैस और अपच हो सकती है. राजमा कई लोगों को पेट दर्द, गैस और भारीपन देता है क्योंकि इसे पचने में समय लगता है. छिलके वाली उड़द दाल भी भारी मानी जाती है और इससे पेट फूलने की समस्या हो सकती है, खासकर कमजोर पाचन वालों में. मटर (सूखी मटर) भी गैस बढ़ाने वाली दालों में गिनी जाती है.

इन बातों का रखें ध्यान 

पेट की परेशानी से बचने के लिए कुछ ज़रूरी बातें ध्यान में रखें. दाल को पकाने से पहले अच्छी तरह भिगोना बहुत ज़रूरी है. पकाते समय हींग, जीरा, अजवाइन और अदरक का इस्तेमाल करें, इससे दाल जल्दी पचती है. दाल को ज़्यादा गाढ़ा न रखें और तली-भुनी दालों से बचें. अगर आपका पेट संवेदनशील है, तो मूंग और मसूर दाल को अपनी डाइट में ज़्यादा शामिल करें. इस तरह सही दाल का चुनाव और सही तरीका अपनाकर आप गैस और पेट फूलने की समस्या से बच सकते हैं.

सेंसिटिव पेट वालों के लिए ये दालें बेहतर 

मूंग और मसूर दाल राजमा या चना की तुलना में सेंसिटिव पेट वालों के लिए इसलिए बेहतर मानी जाती हैं क्योंकि ये दालें हल्की होती हैं और जल्दी पच जाती हैं. इनमें फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा संतुलित होती है, जिससे पेट पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता. वहीं राजमा और चना भारी दालें होती हैं, जिनमें गैस बनाने वाले तत्व ज़्यादा होते हैं, इसलिए ये पेट में सूजन, गैस और भारीपन पैदा कर सकती हैं. मूंग और मसूर दाल पेट में कम गैस बनाती हैं, आंतों को शांत रखती हैं और पाचन तंत्र को आराम देती हैं, इसलिए जिन लोगों को पेट फूलने, एसिडिटी या अपच की समस्या रहती है, उनके लिए ये दालें ज़्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होती हैं.

Lohri 2026 Fashion Tips: लोहड़ी के रंग में रंगें खुद को, ऐसा लुक अपनाएं कि हर कोई कहे—वाह!

Tags:
Advertisement