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MRI test: एमआरआई से पहले मरीज को क्यों दिया जाता है यह इंजेक्शन? क्या इसके बिना पूरी नहीं होती जांच

MRI test: एमआरआई शरीर के अंदरूनी अंगों की स्पष्ट और विस्तृत तस्वीर लेने वाली आधुनिक जांच तकनीक है. इसका उपयोग दिमाग, रीढ़, जोड़ों, मांसपेशियों और अन्य अंगों में मौजूद सूजन, चोट या ट्यूमर जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है.

By: Ranjana Sharma | Published: February 15, 2026 6:59:57 PM IST



MRI test: आज के समय में मेडिकल जांच की दुनिया में एमआरआई एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है. जब डॉक्टर को शरीर के अंदरूनी हिस्सों की बारीक और स्पष्ट तस्वीर चाहिए होती है, तब एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है. यह जांच बिना किसी सर्जरी के शरीर के अंगों की विस्तृत तस्वीरें उपलब्ध कराती है, जिससे बीमारी की सही पहचान करने में मदद मिलती है.

एमआरआई क्यों किया जाता है?

एमआरआई का उपयोग मुख्य रूप से दिमाग, रीढ़ की हड्डी, जोड़ों, मांसपेशियों, हृदय, पेट और अन्य आंतरिक अंगों की जांच के लिए किया जाता है. यदि किसी मरीज को बार-बार सिरदर्द, चक्कर, दौरे, रीढ़ में दर्द, घुटनों में समस्या, ट्यूमर की आशंका या नसों से जुड़ी शिकायत हो, तो डॉक्टर एमआरआई की सलाह दे सकते हैं. यह जांच शरीर में मौजूद असामान्य ऊतकों, सूजन, संक्रमण, चोट या ट्यूमर का पता लगाने में बेहद कारगर होती है. खास बात यह है कि एमआरआई में एक्स-रे की तरह रेडिएशन का उपयोग नहीं होता, बल्कि शक्तिशाली मैग्नेट और रेडियो वेव्स के जरिए तस्वीरें तैयार की जाती हैं.

एमआरआई से पहले कौन सा इंजेक्शन दिया जाता है?

कुछ मामलों में एमआरआई से पहले मरीज को “कॉन्ट्रास्ट डाई” का इंजेक्शन दिया जाता है. इस प्रक्रिया को कॉन्ट्रास्ट एमआरआई कहा जाता है. आमतौर पर इसमें गैडोलिनियम नामक तत्व से बना इंजेक्शन दिया जाता है. यह इंजेक्शन नस के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है.

इंजेक्शन देने के पीछे क्या कारण है?

कॉन्ट्रास्ट डाई का मुख्य उद्देश्य शरीर के अंदर मौजूद अंगों और असामान्य हिस्सों को ज्यादा स्पष्ट दिखाना होता है. जब यह डाई खून के साथ मिलकर शरीर में घूमती है, तो जिन हिस्सों में सूजन, ट्यूमर या असामान्यता होती है, वे सामान्य ऊतकों की तुलना में अलग तरीके से दिखाई देते हैं. इससे डॉक्टर को बीमारी की सटीक स्थिति और आकार समझने में आसानी होती है. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी मरीज के दिमाग में ट्यूमर की आशंका हो, तो कॉन्ट्रास्ट इंजेक्शन के बाद वह हिस्सा अधिक स्पष्ट और अलग रंग में दिखाई दे सकता है. इससे इलाज की योजना बनाने में सटीकता बढ़ जाती है.

क्या यह इंजेक्शन सुरक्षित होता है?

ज्यादातर मामलों में गैडोलिनियम आधारित कॉन्ट्रास्ट सुरक्षित माना जाता है. हालांकि जिन मरीजों को किडनी की समस्या हो या किसी दवा से एलर्जी हो उन्हें पहले डॉक्टर को जानकारी देना जरूरी है. बहुत कम मामलों में हल्की एलर्जी, मतली या चक्कर जैसी शिकायत हो सकती है.

एमआरआई के दौरान क्या सावधानी रखें?

एमआरआई मशीन में शक्तिशाली चुंबक होता है, इसलिए मरीज को जांच से पहले सभी धातु की वस्तुएं जैसे घड़ी, चेन, मोबाइल, चाबी आदि हटाने के लिए कहा जाता है. जिन लोगों के शरीर में पेसमेकर, धातु की प्लेट या क्लिप लगी हो, उन्हें पहले डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए.

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