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Marma Chikitsa: जानिए क्या हैं मर्मा बिंदु, कैसे काम करती है यह थेरेपी और किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

Marma Chikitsa: आयुर्वेद की मर्मा चिकित्सा शरीर के 107 ऊर्जा बिंदुओं पर आधारित एक प्राचीन उपचार पद्धति है, जिसमें दबाव देकर तनाव, दर्द और थकान से राहत पाने का दावा किया जाता है. यह थेरेपी रक्त संचार और नर्वस सिस्टम पर असर डाल सकती है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: March 22, 2026 4:14:52 PM IST



Marma Chikitsa: भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में “मर्मा चिकित्सा” एक बेहद महत्वपूर्ण और प्राचीन उपचार विधि मानी जाती है. माना जाता है कि शरीर में मौजूद विशेष बिंदुओं-जिन्हें मर्मा पॉइंट्स कहा जाता है-पर सही तरीके से दबाव डालकर कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से राहत पाई जा सकती है. लेकिन क्या यह तकनीक वास्तव में असरदार है या सिर्फ एक पारंपरिक मान्यता?

क्या हैं मर्मा ​बिंदु?

आयुर्वेद के अनुसार, मानव शरीर में लगभग 107 मर्मा बिंदु होते हैं. ये वे स्थान हैं जहां मांसपेशियां, नसें, हड्डियां और रक्त वाहिकाएं एक साथ मिलती हैं. इन बिंदुओं को शरीर की “ऊर्जा का केंद्र” माना जाता है. मर्मा बिंदुओं पर हल्का दबाव या मसाज देने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है, जिससे दर्द और तनाव कम हो सकता है.

कैसे काम करती है मर्मा चिकित्सा?

मर्मा थेरेपी में विशेषज्ञ इन बिंदुओं पर उंगलियों या हाथों से दबाव डालते हैं. यह प्रक्रिया कुछ हद तक एक्यूप्रेशर या मसाज थेरेपी जैसी लगती है, लेकिन इसका आधार आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर होता है. 

थेरेपी के लाभ 

  • रक्त संचार को बेहतर बनाती है
  • नर्वस सिस्टम को शांत करती है
  • शरीर की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया को सक्रिय करती है
  • किन समस्याओं में मिल सकता है फायदा?

मर्मा चिकित्सा को लेकर कई दावे किए जाते हैं. इसके जरिए निम्न समस्याओं में राहत मिल सकती है:

  • तनाव और चिंता
  • सिरदर्द और माइग्रेन
  • पीठ और जोड़ों का दर्द
  • थकान और नींद की समस्या

हालांकि, वैज्ञानिक स्तर पर इन दावों के समर्थन में सीमित प्रमाण ही उपलब्ध हैं. कुछ छोटे अध्ययन बताते हैं कि मसाज और प्रेशर थेरेपी से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मर्मा चिकित्सा पर व्यापक रिसर्च अभी भी जारी है.

क्या कहता है विज्ञान?

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, शरीर के कुछ पॉइंट्स पर दबाव डालने से नर्व्स स्टिमुलेट होती हैं और एंडोर्फिन (प्राकृतिक दर्द निवारक हार्मोन) रिलीज हो सकते हैं. इस वजह से मर्मा थेरेपी से मिलने वाली राहत को आंशिक रूप से समझा जा सकता है. हालांकि, इसे किसी गंभीर बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाता.

क्या है जोखिम

मर्मा बिंदु बेहद संवेदनशील होते हैं, इसलिए गलत तरीके से दबाव डालना नुकसानदेह भी हो सकता है.

  • ज्यादा दबाव से चोट लग सकती है
  • गलत बिंदु पर दबाव से दर्द बढ़ सकता है
  • प्रशिक्षित विशेषज्ञ के बिना यह थेरेपी नहीं करानी चाहिए
  • किन लोगों को बचना चाहिए?

कुछ लोगों को मर्मा चिकित्सा से बचना या डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे अपनाना चाहिए:

  • गर्भवती महिलाएं
  • गंभीर हृदय रोगी
  • हाल ही में सर्जरी कराने वाले लोग
  • हड्डी या नसों की गंभीर समस्या वाले मरीज

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