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कोहरे में क्यों थम जाती है ट्रेन और हवाई जहाज की रफ्तार?

कोहरा (Fog) न केवल दृश्यता (Visibility) कम करता है, बल्कि यह परिवहन के लिए एक सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है. रेलवे और एयरलाइंस (Railway and Airlines) के लिए यह केवल देरी का विषय नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा एक सबसे बड़ा गंभीर मुद्दा में से एक है.

By: DARSHNA DEEP | Published: January 4, 2026 12:43:41 PM IST



How Dangerous Is Fog for Trains and Flights?: जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे कोहरे की समस्या ज्यादा देखने को मिलेगी. कोहरे की सबसे बड़ी समस्या ‘रिस्पांस टाइम’ यानी कि प्रतिक्रिया समय को पूरी तरह से खत्म कर देती है. तो वहीं, दूसरी तरफ जब कोई ट्रेन 100 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है, तो उसे पूरी तरह रुकने के लिए लगभग 800 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी चाहिए होती है. लेकिन ठंड में घने कोहरे की वजह से लोको पायलट को सिग्नल तब दिखता है जब वह उसके बिल्कुल करीब (20-30 मीटर) पहुंच जाता है.तो वहीं, इतनी कम समय में ब्रेक लगाना ट्रेन को पटरी से उतार सकता है इतना ही नहीं, पीछे से आ रही दूसरी ट्रेन से टक्कर की गंभीर समस्या भी देखने को मिल सकती है. 

कोहरे में कैसे काम करते हैं हवाई जहाज?

बात करें हवाई जहाजों के बारे में तो, रनवे पर विमान की गति 250 किमी/घंटा से ज्यादा होती है. तो वहीं, दूसरी तरफ लैंडिग के समय अगर अगर पायलट को रनवे की सेंटर लाइन या लाइटें नहीं दिखतीं, तो विमान का संतुलन एक तरह से बिगड़ सकता है. तो वहीं, दूसरी तरफ कोहरे में ‘भ्रम’ (Spatial Disorientation) पैदा होता है, जिससे पायलट को यह समझने में मुश्किल होती है कि विमान जमीन से कितनी ऊपर  है. 

सुरक्षा के लिए क्या करते हैं रेलवे और एयरलाइंस?

1. भारतीय रेलवे के उपाय

फॉग सेफ्टी डिवाइस (FSD), दरअसल, यह एक GPS आधारित पोर्टेबल डिवाइस है जिसे ड्राइवर अपने पास रखता है. इसके अलावा यह डिवाइस आने वाले सिग्नल की सटीक दूरी बताता है और जोर से ‘बीप’ की आवाज करता है ताकि ड्राइवर को पता चले कि अब रफ्तार कितनी धीमी करनी है या फिर नहीं. इसके अलावा रेलवे आज भी एक पुरानी तकनीक का ही ज्यादातर इस्तेमाल करती है. जहां, घने कोहरे में सभी पटरियों पर छोटे पटाखे (डेटोनेटर्स) लगाए जाते हैं, ताकि जब ट्रेन का पहिया इन पर चढ़ता है, तो एक धमाका होता है. और यह आवाज लोको पायलट के लिए ‘खतरे का संकेत’ होती है कि आगे सिग्नल है. इतना ही नहीं रेलवे की पटरियों के किनारे खंभों पर चमकीले पेंट और चूने से निशान बनाए जाते हैं ताकि ड्राइवर को अंदाजा रहे कि वह कहां है.

2. एयरलाइंस के उपाय

CAT-III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के मुताबिक, यह एक बहुत ही आधुनिक रेडियो नेविगेशन प्रणाली होती है. जानकारी के मुताबिक,  यह विमान के कंप्यूटर को सीधे रनवे से जोड़ने का काम करती है. जिससे पायलट को बाहर देखने की जरूरत नहीं पड़ती, कंप्यूटर खुद ही विमान को रनवे पर अलाइन (Align) करने का काम करता है. तो वहीं, दूसरी तरफ हर एयरपोर्ट CAT-III से लैस नहीं होता और हर पायलट इसके लिए ट्रेंड नहीं होता है. इसके साथ ही सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक, अगर विजिबिलिटी 50-100 मीटर से कम है और पायलट या एयरपोर्ट तैयार नहीं है, तो रिस्क लेने के बजाय उड़ान रद्द करना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता बच सकता है.

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