Dhaula Kuan Name History : देश की राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक धौला कुआं है. यहां से हर रोज लाखों लोग गुजरते होंगा. धौला कुआं के नाम से मेट्रो स्टेशन भी है. यह दिल्ली का सबसे अहम इलाका है. लोग दिल्ली एयरपोर्ट जाने के लिए भी इसी स्टेशन से मैट्रो लेते हैं. यह चौराहा तीन राज्यों यूपी, हरियाणा और राजस्थान को आपस जोड़ता है. वहीं धौला कुआं दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को भी जोड़ता है. उत्तम नगर से रिंग रोड होते हुए नोएडा या गुरुग्राम जाना हो तो भी इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है. क्या आपने कभी सोचा है कि इसका नाम धौला कुआं कैसे पड़ा? यहां कोई कुआं है कि नहीं? इस नाम के पीछे का असली सच क्या है?
नाम के पीछे का असली सच क्या है?
धौला कुआं मेट्रो स्टेशन के पास ही में एक डीडीए पार्क मौजूद है. इस पार्क में एक कुएं को लोहे के जाल से बंद कर रखा है. कुआं कितना गहरा है, इसके बारे में आजतक नहीं पता चला है. कुएं की तली पर सफेद पत्थर पड़े हुए थे. इस वजह से इसका पानी सफेद नजर आता है. सफेद को देसी भाषा में उजला या धौला कहा जाता है. इसलिए इसका नाम धौला कुआं पड़ा है. कुआं 300 साल से ज्यादा पुराना है.
किसने कराया कुएं का निर्माण?
इसी कुएं से इलाके के चौराहे का नाम और मेट्रो स्टेशन का नाम जुड़ा हुआ है. आसपास के इलाके के लोगों का कहना है कि कुएं का निर्माण मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने कराया था. कुएं का निर्माण भी सफेद पत्थरों से होता है. इस वजह से कुएं के पानी का रंग सफेद दिखता है. 1857 की क्रांति के दौरान हरियाणा-यूपी और दिल्ली के हजारों सेनानी यहां एक साथ इकट्ठे हुए थे. उन सभी ने धौला कुआं में नमक की बोरियां डालकर देश को आजाद कराने के साथ अंग्रेजों के आगे न झुकने की शपथ ली थी.