Daylight Saving Time: हर साल एक समय ऐसा आता है जब घड़ियों का समय बदल दिया जाता है. इसे डेलाइट सेविंग टाइम (Daylight Saving Time) कहा जाता है. इस व्यवस्था के तहत साल में दो बार घड़ी को एक घंटा आगे और फिर बाद में एक घंटा पीछे किया जाता है, ताकि दिन की रोशनी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि ये तरीका लंबे समय से विवादों में भी रहा है.
जिन अमेरिकी राज्यों में डेलाइट सेविंग टाइम लागू होता है, वहां ये हर साल मार्च के दूसरे रविवार से शुरू होता है. साल 2026 में ये 8 मार्च को शुरू हुआ. उस दिन रात 2 बजे घड़ियों को एक घंटा आगे कर दिया गया और समय सीधे 3 बजे हो गया.
डेलाइट सेविंग टाइम कैसे काम करता है?
इस व्यवस्था में मार्च के महीने में घड़ी को एक घंटा आगे कर दिया जाता है. इससे सुबह सूरज थोड़ा देर से उगता हुआ दिखता है और शाम को देर से ढलता है. ये बदलाव लगभग आधे साल तक रहता है. इसके बाद नवंबर में घड़ी को फिर एक घंटा पीछे कर दिया जाता है और समय पहले जैसा हो जाता है.
डेलाइट सेविंग टाइम क्यों लागू किया गया?
डेलाइट सेविंग टाइम का मेन उद्देश्य दिन की रोशनी का बेहतर उपयोग करना था. जब मौसम गर्म होता है और लोग ज्यादा एक्टिव रहते हैं, तब शाम के समय ज्यादा रोशनी मिले इसी सोच के साथ इसे शुरू किया गया था. अमेरिका में इसे सबसे पहले प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऊर्जा बचाने के प्रयास के रूप में लागू किया गया था. हालांकि अब भी इस बात पर बहस होती रहती है कि इससे वास्तव में ऊर्जा बचती है या नहीं.
स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि साल में दो बार घड़ी का समय बदलने से लोगों की नींद पर असर पड़ता है. इससे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम प्रभावित होती है. कुछ शोधों में ये भी पाया गया है कि समय बदलने के बाद स्ट्रोक और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है, क्योंकि लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती.
किन राज्यों में ये लागू नहीं होता?
अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में डेलाइट सेविंग टाइम लागू होता है, लेकिन हवाई और एरिजोना के अधिकांश हिस्सों में इसे नहीं अपनाया जाता. ये राज्य पूरे साल एक ही समय यानी स्टैंडर्ड टाइम पर चलते हैं. हालांकि एरिजोना के अंदर स्थित नवाजो नेशन क्षेत्र में डेलाइट सेविंग टाइम का पालन किया जाता है. इसके अलावा कुछ अमेरिकी क्षेत्रों जैसे प्यूर्टो रिको, गुआम और यूएस वर्जिन आइलैंड्स में भी ये व्यवस्था लागू नहीं है.

