Makar Sankranti: मकर संक्रांति भारत में सबसे खुशी से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है. खास बात यह है कि इसे पूरे देश में अलग-अलग तरीकों और अलग-अलग रीति-रिवाजों से इस शुभ अवसर को मनाया जाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस त्यौहार को त्रिपुरा में, मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है. तो इसे फसल का त्योहार भी माना जाता है. पूरे भारत में, जनवरी महीने में फसलों की कटाई से जुड़े त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाए जाते हैं, लेकिन उनके नाम और रीति-रिवाज काफी अलग होते हैं. आइए भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति के बारे में और जानें.
UP और बिहार
यूपी-बिहार में मकर संक्रांति को काफी खास तरीके से मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को मुख्य रूप से ‘खिचड़ी‘ के नाम से जाना जाता है. इस दिन गंगा नदी में डुबकी लगाना और दान देना बहुत शुभ माना जाता है. वहीं मकर संक्रांति के दौरान प्रयागराज में ‘माघ मेला’ भी लगता है. इस त्योहार पर दाल और चावल से बनी खिचड़ी, तिल के लड्डू और गुड़ जैसे पकवानों का खास महत्व होता है. बिहार में खिचड़ी के त्योहार के दौरान दही और चूड़ा खाना भी बहुत ज़रूरी माना जाता है.
गुजरात और राजस्थान
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुजरात में इस त्यौहार को ‘उत्तरायण’ कहा जाता है, बताया जा रहा है कि यहां यह एक बड़े पतंग उत्सव के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन गुजरात और राजस्थान में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है. उत्तरायण के दौरान पारंपरिक रूप से ‘उंधियू‘ और ‘चिक्की‘ जैसे खास पकवान खाए जाते हैं. राजस्थान में, पतंग उड़ाने के साथ-साथ, शादीशुदा औरतें अपनी सास या बड़ों को उनका आशीर्वाद पाने के लिए ‘सिधा’ (कच्चा अनाज और पैसे) देती हैं.
दक्षिण भारत
तमिलनाडु में इस त्यौहार को बड़े ही दिलचस्प तरीके से मनाया जाता है. जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु में इसे चार दिनों तक ‘पोंगल’ के रूप में मनाया जाता है.
भोगी पोंगल: नई शुरुआत के प्रतीक के तौर पर पुरानी चीज़ों को जलाया जाता है.
थाई पोंगल: सूर्य देव को ‘पोंगल’ (दूध और नए चावल से बनी डिश) चढ़ाई जाती है.
मट्टू पोंगल: खेती के लिए ज़रूरी खेत के जानवरों, खासकर बैलों की पूजा की जाती है.
कानुम पोंगल: इस दिन परिवार एक साथ मिलकर जश्न मनाते हैं.
कर्नाटक
कर्नाटक में इसे ‘सुग्गी‘ कहा जाता है, जहाँ लोग ‘एल्लु-बेल्ला‘ (तिल, गुड़ और नारियल का मिश्रण) एक-दूसरे को देते हैं.
पंजाब और हरियाणा
साथ ही आपको बता दें कि पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है. लोहड़ी संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है. लोग अलाव जलाते हैं, उसके चारों ओर नाचते हैं, और मूंगफली, तिल की रेवड़ी और मुरमुरे चढ़ाते हैं. अगले दिन को माघी के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नदियों में स्नान करना और दान देना शामिल है.
झारखंड
झारखंड के आदिवासी इलाकों में मकर संक्रांति को ‘टुसू परब‘ के रूप में मनाया जाता है. यह फसल का त्योहार अपनी कलात्मक परंपराओं के लिए जाना जाता है. इसकी तैयारियां दिसंबर से ही शुरू हो जाती हैं. यहां की लड़कियां मिट्टी से ‘टुसू‘ की मूर्तियां बनाना शुरू कर देती हैं, जिन्हें उम्मीद और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है. पतंग उड़ाने या अलाव जलाने के बजाय, लोकगीतों और लोककथाओं का ज़्यादा महत्व होता है. 14 जनवरी को, गाने-बजाने, नाचने और सामूहिक भोज के बाद, मूर्तियों को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है.
उत्तराखंड
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में इस त्योहार को ‘उत्तरायणी‘ के नाम से जाना जाता है. बागेश्वर इस उत्सव का मुख्य केंद्र है, जहां एक बड़ा मेला लगता है. दूसरी जगहों के विपरीत, यह त्योहार सिर्फ़ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी के किनारों और बाज़ारों में मनाया जाने वाला एक सामुदायिक उत्सव है. कड़ाके की ठंड के बावजूद, लोग सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में डुबकी लगाने (माघ स्नान) आते हैं.
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