Prison Escape Law: दुनिया में मौजूद लगभग हर देश में जेल तोड़ना या वहां से भागना जुर्म माना जाता है. जिसके बाद कैदी के पकड़े जाने पर उसकी सजा बढ़ा दी जाती है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि दुनिया में कई देश ऐसे भी हैं, जहां जेल से भागना कोई अपराध नहीं है. जर्मनी एक ऐसा देश है जहां का कानून बाकी दुनिया से काफी अलग और दिलचस्प माना जाता है.
क्या कहता है कानून?
जर्मन कानून एक बहुत ही मानवीय दर्शन पर टिका माना जाता है. वहां के कानून निर्माताओं के मुताबिक, आजादी की चाहत हर इंसान का एक बुनियादी स्वभाव है. जैसे भूख लगने पर खाना की खोज करना एक प्राकृतिक क्रिया है, वैसे ही कैदी से निकलकर आजाद होने की कोशिश भी एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया है.
भागने की अधिक सजा नहीं
19वीं सदी से जर्मनी में माना जाता है कि आजादी के लिए प्रयास करना कोई आपराधिक इरादा नहीं दर्शाती है. इसलिए अगर कोई कैदी ऐसा करता है, तो उसे जेल से भागने के लिए अधिक सजा नहीं दी जाएगी. अगर पुलिस भागे हुए कैदी को दोबारा पकड़ लेती है, तो उसे भगोड़ा मानकर उसकी सजा नहीं बढ़ाई जाती है, उसे जेल में लाया जाता है कि ताकी वह अपनी पुरानी सजा को पूरा कर सके.
आसान नहीं है कानून
लेकिन यह कानून जितना सुनने में आसान लग रहा है, उतना असल में है नहीं. कानून भले ही भागने को जुर्म न माने, लेकिन भागने के तरीके पर सख्त नजर होती है. अगर कैदी भागने के दौरान कुछ ऐसा कर देता है, जो उसे नहीं करना चाहिए. तो उसे सजा दी जाती है. अगर कैदी जेल की वर्दी पहनकर, रिश्वत देकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर या हिंसा कर भागता है, तो उसे सजा दी जाती है. इसी कारण तकनीकी तौर पर कैदी किसी न किसी कारण से कानून के दायरे में आ जाता है. क्योंकि बिना हिंसा, नुकसान और चोरी के वह भाग नहीं सकता है.
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कई देशों में है ये कानून
जेल से भागने पर भले ही उसकी सजा न बढ़ाई जाए. लेकिन इससे कैदी की प्रोफाइल पर बुरा असर पड़ता है. कैदी की रिहाई की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं, पैरोल मिलना मुश्किल और जेल के भीतर मिल रही सुविधाएं भी कम हो जाती हैं. जर्मनी के अलावा ऑस्ट्रिया, बेल्जियम और मेक्सिको जैसे देशों में इसी तरह के कानून को मान्यता दी गई है.
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