Safest City For Women: NARI 2025 रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा के आधार पर शहरों का रैंक दिया गया है. जिसमें साफ पाया गया कि 60% महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं, वहीं बाकि 40 प्रतिशत महिलाएं असुरक्षित महसूस करती है. इस रैंक में विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर लिस्ट में लिस्ट में सबसे ऊपर रहे हैं. वहीं दिल्ली जैसी जगह कम रैंक पर आई है. भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन चुका है. NARI (नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स ऑन विमेन सेफ्टी) 2025 से इस बारे में एक नई जानकारी सामने आई है. जिसमें करीब 21 शहरों में 12,000 से ज़्यादा महिलाओं का सर्वे किया गया कि लोकल सिस्टम की जिम्मेदारी और अनुभव को समझा जा सकें.
60 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो अपने शहर में सुरक्षित महसूस करती हैं. वहीं बाकि 40 प्रतिशत डर के साय में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं. शहरों की रैंकिंग के साथ यह रिपोर्ट जानकारी देती है कि क्या काम कर रहा है कि क्या नहीं. हर शहर को एक ऐसी जगह बनाने के लिए चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करती है. जहां सभी महिला सुरक्षित और पूरी आजादी के साथ रह सकें.
2025 में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित भारतीय शहर (NARI रिपोर्ट)
- कोहिमा (नागालैंड)
- विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
- भुवनेश्वर (ओडिशा)
- आइजोल (मिजोरम)
- गंगटोक (सिक्किम)
- ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश
- मुंबई (महाराष्ट्र)
7 सबसे सुरक्षित राज्य
कोहिमा (नागालैंड)
- लैंगिक संतुलन सबसे बड़ा कारण.
- सक्रिय सामुदायिक पुलिसिंग.
- व्यक्तिगत संपर्क, पड़ोस की निगरानी.
- महिलाओं की भागीदारी.
विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
- विकसित अवसंरचना और पुलिस.
- अधिकारियों और जनता के बीच मजबूत समन्वय.
- शहर में सुगम सार्वजनिक परिवहन.
- महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के योजनाबद्ध तरीके.
भुवनेश्वर (ओडिशा)
- स्थागत मॉडल और सक्रिय अपराध रोकथाम.
- भुवनेश्वर समावेशी शहरी नियोजन.
- स्ट्रीटलाइट्स और महिला-हितैषी कार्यक्रमों पर खर्च.
- संवेदनशीलता और प्रभावी निवारण तंत्र.
आइजोल (मिजोरम)
- सांस्कृतिक मूल्य सामाजिक सद्भाव और विश्वास.
- सामुदायिक सुरक्षा व्यवस्था सुव्यवस्थित.
- पुलिस की मौजूदगी क्षेत्र में काफी सक्रिय.
- रात के समय भी सड़कें सुरक्षित रहती हैं.
गंगटोक (सिक्किम)
- सामाजिकता और लैंगिक संवेदनशीलता.
- संस्थानों की त्वरित प्रतिक्रिया.
- नागरिक समाज और पुलिस.
- महिलाओं को अपने मुद्दे उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश)
- समावेशी शासन, जागरूकता अभियान.
- उप-स्थानीय प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी.
- सुरक्षा के विकास में मुख्य भूमिका.
- स्थानीय स्तर पर महिला संगठनों और नेताओं की भूमिका.
मुंबई (महाराष्ट्र)
- सक्रिय पुलिसिंग, सार्वजनिक परिवहन की उच्च स्तरीय सुरक्षा.
- नागरिक एवं आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की बढ़ती संभावनाएं.
- महिलाओं का अधिक काम करना.
- अधिक रिपोर्टिंग और कार्यस्थलों पर सुरक्षा.
- सामाजिक सुरक्षा (POSH) की अच्छी नीतियां.
एनएआरआई रिपोर्ट 2025
एनएआरआई रिपोर्ट 2025 भारतिय शहरों में हो रहे विकास को प्रोत्साहित करती है. लेकिन इसके साथ ही सुधार पर भी जोर देती है. रिपोर्ट बताती है कि कैसे शहरों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है. पुलिस व्यवस्था से परे भी सोचना होगा. भारत का जनसांख्यिकीय लाभ तभी फलेगा-फूलेगा. तभी महिलाएं सुरक्षित महसूस कर पाएंगी. महिलाएं की भूमिका देश हो या फिर घर, हर जगह महत्वपूर्ण है.
छोटे शहर अक्सर अधिक सुरक्षित क्यों?
- सामुदायिक और सामाजिक सामंजस्य: छोटे शहरों के लोगों के बीच जान पहचान काफी हो जाता है. जिससे सामूहिक निगरानी संभव होती है.
- अपराधियों का बच निकलना मुश्किल: छोटे शहरों में नजर से बच निकलना कठिन होता है. क्योंकि, अधिकतर चेहरे परिचित होते हैं.
- कम अपराध दर: बड़े, भीड़भाड़ वाले शहरों की तुलना में छोटे, कम आबादी वाले क्षेत्रों में हिंसक अपराध दर कम होती है.
- कम भीड़भाड़: छोटे शहरों में अक्सर सामाजिक-आर्थिक असमानता और भीड़भाड़ कम होती है, जो शहरी हिंसा को बढ़ावा देने वाले ज्ञात कारक हैं.