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दूरदर्शन का वो सीरियल, जो था “बालिका वधू” और “अनुपमा” से भी जायदा खास, जिसे भूले नहीं भुला पाए दर्शक

स्त्री तेरी कहानी: 19 साल पुराना सीरियल जिसने नारी शक्ति को दी नई पहचान। टीवी की दुनिया में कई ऐसे सीरियल बने हैं, जिन्होंने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। कुछ शो सास-बहू के झगड़े और ड्रामे के कारण चर्चा में रहे, तो कुछ रोमांस और ग्लैमर से भरपूर थे। इन्हीं में से एक है "स्त्री तेरी कहानी", जो आज से लगभग 19 साल पहले दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था।

Published by Ananya verma

स्त्री तेरी कहानी: 19 साल पुराना सीरियल जिसने नारी शक्ति को दी नई पहचान। टीवी की दुनिया में कई ऐसे सीरियल बने हैं, जिन्होंने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। कुछ शो सास-बहू के झगड़े और ड्रामे के कारण चर्चा में रहे, तो कुछ रोमांस और ग्लैमर से भरपूर थे। इन्हीं में से एक है “स्त्री तेरी कहानी”, जो आज से लगभग 19 साल पहले दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था।

इस शो ने न केवल दर्शकों को मनोरंजन दिया, बल्कि महिलाओं की ताकत और संघर्ष की सच्चाई को भी सामने रखा। “अनुपमा”, “बालिका वधू”, “दिया और बाती हम” या “उड़ान” जैसे सीरियल अपनी अलग-अलग कहानियों के लिए लोकप्रिय हुए, लेकिन “स्त्री तेरी कहानी” उन सबमें खास रहा क्योंकि यह सीधे-सीधे नारी शक्ति और उनके संघर्षों  की कहानी कहता था।

सीरियल की लोकप्रियता

2006 में दूरदर्शन पर जब “स्त्री तेरी कहानी” शुरू हुआ, तो लोगों में इसे लेकर खास उत्सुकता देखने को मिली। उस दौर में मनोरंजन के साधन बहुत सीमित थे। न टीवी चैनलों की इतनी भरमार थी और न ही ओटीटी प्लेटफॉर्म का कोई नामो-निशान। लोग शाम होते ही अपने पसंदीदा सीरियल देखने के लिए टीवी के सामने बैठ जाते थे। स्त्री तेरी कहानी” का नाम सुनते ही दर्शक अपना काम जल्दी निपटाकर टीवी के सामने बैठ जाते। यही वजह थी कि इस सीरियल के 743 से भी ज्यादा एपिसोड प्रसारित हुए और इसके दो सीजन बने। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे आज भी लोग याद करते हैं और इसकी कहानी को भूला नहीं पाए हैं।

शो की टीम और स्टारकास्ट

इस बेहतरीन शो का निर्देशन सुनील प्रसाद ने किया था, जबकि इसकी लेखनी किशोर मूडबिद्री और शाहीन ने संभाली। शो का निर्माण मशहूर एक्ट्रेस सायरा बानो ने किया। इसकी स्टारकास्ट भी बेहद दमदार रही। रवि दुबे, नम्रता थापा, मेहर विज, निखिल राज खेरा, स्निग्धा पांडे और सोनिका हांडा जैसे कलाकारों ने इसमें यादगार भूमिकाएँ निभाईं। इन कलाकारों के अभिनय ने शो की कहानी को जीवंत बना दिया और दर्शकों से जुड़ाव पैदा किया।

चार सहेलियों की जिंदगी की कहानी
“स्त्री तेरी कहानी” असल में चार लड़कियों की कहानी है। ये चारों एक ही कॉलेज से पढ़ी थीं और एक-दूसरे की सबसे अच्छी दोस्त थीं। कॉलेज खत्म होने के बाद इनका सफर असली जिंदगी की ओर बढ़ता है, जहां हर किसी का सपना और संघर्ष अलग होता है। राधा-कहानी की मुख्य नायिका, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती है। हर किसी सहेली की कहानी अलग है, लेकिन इनके दुख-सुख, सपने और रिश्तों का ताना-बाना इन्हें जोड़कर रखता है। इन चारों की जिंदगी एक साधारण लड़की के संघर्ष की झलक दिखाती है। समाज में और घर-परिवार में उन्हें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, वही इस सीरियल की असली कहानी है।

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क्यों था यह शो खास?

उस वक्त टीवी पर ज्यादातर सीरियल सास-बहू की खींचतान, रिश्तों की राजनीति या चटपटे ड्रामे पर आधारित होते थे। लेकिन “स्त्री तेरी कहानी” अलग था। इसमें महिलाओं को सिर्फ घरेलू किरदार तक सीमित नहीं किया गया, बल्कि उनके सपनों, महत्वाकांक्षाओं और संघर्षों को बड़े ही संवेदनशील अंदाज में दिखाया गया। यह शो बताता है कि औरत सिर्फ परिवार और रिश्तों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके अपने सपने भी हैं। वह चाहे तो समाज की किसी भी बाधा को पार करके आगे बढ़ सकती है।

टीवी से ओटीटी तक का सफर

वेब सीरीज, फिल्में -सबकुछ आसानी से उपलब्ध है। इसकी IMDb रेटिंग 8.3 है, जो इस बात का सबूत है कि शो कितना पसंद किया गया था। इसी वजह से “स्त्री तेरी कहानी” को भी भुलाया नहीं जा सका। अब इसे यूट्यूब पर आसानी से देखा जा सकता है। जिन लोगों ने इसे पहले देखा है, वे इसे दोबारा देखकर पुरानी यादों में खो जाते हैं, और नई पीढ़ी भी इस शो से जुड़कर समझ सकती है कि 19 साल पहले भी टीवी पर कितनी दमदार कहानियाँ दिखाई जाती थीं।

महिलाओं के लिए प्रेरणा

“स्त्री तेरी कहानी” सिर्फ एक सीरियल नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है। इसने महिलाओं को यह विश्वास दिलाया कि उनकी कहानी भी मायने रखती है। वे भी अपने सपनों के पीछे दौड़ सकती हैं और समाज की चुनौतियों का सामना कर सकती हैं। आज जब हम “अनुपमा” या “बालिका वधू” जैसे शोज की बात करते हैं, तो महसूस होता है कि “स्त्री तेरी कहानी” उन सबका एक मजबूत आधार रहा है। इसने यह साबित किया कि महिलाओं की जिंदगी की सच्चाई और संघर्ष भी दर्शकों को उतना ही आकर्षित कर सकते हैं, जितना कोई ड्रामा या रोमांटिक कहानी।

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