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Sudha Reddy Foundation: व्यापार से लेकर मेट गाला तक, सुधा रेड्डी ने बताया बिजनेस, फैशन और परिवार में संतुलन का मंत्र

Sudha Reddy Foundation: सुधा रेड्डी, डायरेक्टर MEIL और चेयरपर्सन सुधा रेड्डी फाउंडेशन, न सिर्फ एक सफल उद्यमी और फैशन आइकॉन हैं, बल्कि एक ऐसी मां भी हैं जो परिवार के लिए समय निकालती हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: March 7, 2026 3:53:53 PM IST



Sudha Reddy Foundation: चाहे मेट गाला हो या पेरिस ओलंपिक्स, सुधा रेड्डी, डायरेक्टर, MEIL और चेयरपर्सन, सुधा रेड्डी फाउंडेशन, ने न सिर्फ देश का प्रतिनिधित्व किया है बल्कि फैशन आइकॉन के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है. लेकिन इसके पीछे हैं एक मां, जो परिवार के साथ  समय बिताने पर ध्यान देती हैं, एक महिला जो स्टीरियोटाइप को अपनी राह तय करने नहीं देती, और एक स्टाइल प्रेमी जो फैशन के जरिए खुद को व्यक्त करती हैं.

संपन्न दिनचर्या और परिवार के लिए समय

सुधा रेड्डी बताती हैं कि उनके दिन कभी भी एक जैसे नहीं होते. सुबह वे ध्यान और प्रार्थना के साथ शुरू करती हैं, उसके बाद फाउंडेशन के काम, मीटिंग्स और प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देती हैं. कुछ दिन वे चैरिटी में व्यतीत करती हैं, तो कुछ दिन व्यवसाय, कला या इवेंट्स की योजना में. वे परिवार के लिए भी समय निकालती हैं और मानती हैं कि हर जगह पूरी तरह मौजूद रहना जरूरी है.

सफलता का सफर

सुधा ने अपनी यात्रा को लगातार बढ़ने का सफर बताया, न कि केवल एक गंतव्य. उनका कहना है कि यह रातोंरात सफलता नहीं है, बल्कि अनुशासन, लचीलापन और लगातार सीखने की इच्छा से बनाई गई यात्रा है. उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार स्टीरियोटाइपिकल बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने करियर की दिशा तय करने में उन्हें अनुमति नहीं दी. लगातार मेहनत और दक्षता ने उन्हें अपने क्षेत्र में विश्वसनीयता दिलाई. सुधा के दो बेटे हैं. वे मानती हैं कि युवा पीढ़ी के साथ संवाद और खुलापन जरूरी है. वे अपने बच्चों को सम्मान, सहानुभूति और अनुशासन के मूल्यों के साथ जोड़ती हैं.

फैशन और ग्लोबल प्लेटफॉर्म

मेट गाला, मिस वर्ल्ड, पेरिस हाई कॉचर वीक और पेरिस ओलंपिक्स जैसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर सुधा ने भारतीय शिल्प और संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया. उनका व्यक्तिगत स्टाइल भारतीय पहचान और शिल्पकला को महत्व देता है.

स्वास्थ्य और फिटनेस

47 वर्ष की उम्र में भी सुधा नियमित व्यायाम, पिलेट्स और योग करती हैं. उनका मानना है कि फिटनेस केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि ताकत, संतुलन और दीर्घायु के लिए है. वे संतुलित आहार और मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक कल्याण पर भी जोर देती हैं. वे अपनी 13 साल की खुद को संदेश देती हैं: “अपने सफर पर भरोसा रखो, जल्दबाजी मत करो, जिज्ञासु रहो, दयालु बनो और अपनी शक्ति को कम मत आंको.

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