Fatima Sana Shaikh: फिल्म दंगल से मशहूर हुईं फातिमा सना शेख ने हाल ही में अपनी ज़िंदगी के एक मुश्किल दौर के बारे में बात की है. उन्होंने बताया कि कैसे वह बुलिमिया नाम की ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रही थीं. 33 साल की एक्ट्रेस ने बुलिमिया से अपनी लड़ाई के बारे में बात करते हुए अपना अनुभव शेयर किया है. उन्होंने बताया कि फिल्म ‘दंगल’ की ट्रेनिंग के दौरान खाने के साथ उनका रिश्ता खराब हो गया था. फातिमा ने कहा कि वह फिल्म के लिए एक खास इमेज बनाए रखने के लिए जुनूनी थीं, जिसकी वजह से वह बहुत ज़्यादा खाती थीं और फिर खुद को भूखा रखती थीं. बुलिमिया नर्वोसा एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिससे शरीर की इमेज खराब हो जाती है और ज़्यादा खाने के बाद भरपाई करने वाले व्यवहार होते है. आइए इस डिसऑर्डर के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में जानते है…
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हालांकि फातिमा सना शेख अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी सचेत रहती हैं और इसके बारे में बात करना पसंद नहीं करतीं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने पिछले रिश्तों के बारे में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए है. जिसमें उन्होंने कहा कि वह टॉक्सिक रिश्तों में रही है.
‘मैं भी टॉक्सिक रिश्तों में रही हूं’
फातिमा ने कहा है कि ‘मैं भी टॉक्सिक रिश्तों में रही हूं. यह कहना बहुत मुश्किल है, ‘हां, हम यह करेंगे, हम वह करेंगे.’ लेकिन जब आप ऐसे रिश्ते में होते हैं, तो समझना बहुत मुश्किल हो जाता है. इसीलिए मैं समझती हूं कि कई महिलाएं इस दौर से गुजरती है. खासकर वे जो काम नहीं करतीं और अपने पति पर आर्थिक रूप से निर्भर होती है. एक खराब शादी से बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है.’
बुलिमिया क्या है?
बुलिमिया जिसे बुलिमिया नर्वोसा भी कहा जाता है. एक गंभीर ईटिंग डिसऑर्डर है. इस डिसऑर्डर में व्यक्ति एक बार में बहुत ज़्यादा खाना खाता है और फिर उल्टी करके या बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज करके उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है. डॉक्टरों के अनुसार यह समस्या शरीर की खराब इमेज और जटिल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देती है.
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फातिमा ने बताया कि वह दो साल तक बुलिमिया से जूझती रहीं, और उनके सख्त डाइटिंग तरीकों ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, “मैं अब भी खाने के बारे में सोचती हूं, लेकिन मैंने इस खराब रिश्ते को बदलने की समझ हासिल कर ली है.”
फातिमा की कहानी एक जरूरी संदेश देती है कि मानसिक स्वास्थ्य और खाने की आदतें कितनी गहराई से जुड़ी हो सकती है. यह दिखाता है कि हमें अपनी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जागरूक रहना चाहिए और मदद मांगने में हिचकिचाना नहीं चाहिए.