Ranveer Singh Struggle Life: पहले स्टारबक्स में घिसे जूते, फिर रात-दिन किया परदे के पीछे काम, ऐसे ही नहीं रणवीर बने रियल लाइफ के ‘धुरंधर’

Dhurandhar: रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर लगातार ताबड़तोड़ कमाई कर रही है. कोई इस फिल्म की कामियाबी की वजह रणवीर को बता रहा है तो कोई मेजर मोहित शर्मा को. लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को मानेंगे कि इस फिल्म के दौडंने की वजह कुछ और नहीं बल्कि रणवीर सिंह है.

Published by Heena Khan

Ranveer Singh Life Story: रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर लगातार ताबड़तोड़ कमाई कर रही है. कोई इस फिल्म की कामियाबी की वजह रणवीर को बता रहा है तो कोई मेजर मोहित शर्मा को. लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को मानेंगे कि इस फिल्म के दौडंने की वजह कुछ और नहीं बल्कि रणवीर सिंह है. रणवीर उन एक्टर्स में गिने जाते हैं. हमेशा से रणवीर को ऐसे रोल मिले हैं जिसको निभाना हर किसी की बात नहीं थी. चाहे वो Bajirao हो या फिर अलाउद्दीन खिलजी. रणवीर सिंह ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया है. एक इंटरव्यू में रणवीर सिंह ने अपनी जर्नी के बारे में विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि उनकी दादी उन्हें बचपन से ही हीरो बनने के लिए इंस्पायर करती थीं. वहीं से उन्होंने हीरो बनने का सपना देखना शुरू किया. उन्होंने बताया कि जब वो बच्चे थे, तो वो अपने परिवार के साथ बाहर जाते थे, लेकिन वो कभी खेलते नहीं थे; इसके बजाय, वो अक्सर फिल्में देखते थे या गाने सुनते थे. चलिए आज जानेंगे कि आखिर कैसे रणवीर सिंह ने सितारों की दुनिया में कदम रखा और हजारों सितारों के बीच एक चमकता हुआ सितारा बन गया. 

यहां से शुरू हुआ असली स्ट्रगल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उनकी पहली नौकरी असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर थी, दरअसल,उनके कुछ रिश्तेदार थे जो फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे. उनकी पहली नौकरी मैनेजमेंट में थी. इस दौरान रणवीर सिंह ने लिखा कि उन्होंने फिल्ममेकर शाद अली से काम मांगा, और उन्होंने उन्हें फिल्म ‘झूम बराबर झूम’ में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी दी. असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी 24 घंटे की होती है. कोई फिक्स्ड घंटे नहीं होते. उन्होंने एक साल तक काम किया, लेकिन एक साल बाद, जब उन्होंने खुद को देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें बहुत कम नींद मिल रही है. इससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो गए और उनकी सेहत पर असर पड़ा. दरअसल, वो पहले जितने फिट नहीं थे. उसके बाद, उन्होंने थिएटर कोर्स किया.

Starbucks में भी घिसे जूते

इतना ही नहीं, बल्कि रणवीर सिंह ने अमेरिका में इंडियाना यूनिवर्सिटी में थिएटर में बैचलर डिग्री के लिए एडमिशन लिया. वहां, वो पढ़ाई के साथ-साथ पॉकेट मनी कमाने के लिए पार्ट-टाइम काम करते थे. वोग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान स्टारबक्स में पार्ट-टाइम जॉब भी की है. 

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रणवीर के संघर्ष का दौर

रणवीर सिंह ने 10वीं क्लास में तय कर लिया था कि वो एक्टर बनना चाहते हैं. वो एक दिन हिंदी फिल्मों में बड़ा हीरो बनना चाहते थे. एक समय वो हायर स्टडीज़ के लिए विदेश गए, और मुंबई लौटने के बाद उन्होंने एक्टर बनने की पूरी कोशिश की. उन्होंने एक्टर बनने के लिए हर मुमकिन कोशिश की. एक इंटरव्यू के दौरान रणवीर ने अपने रिजेक्शन और अपने एक्टिंग के सफर के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि उनका संघर्ष का दौर मुश्किलों से भरा था.

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क्या बोले रणवीर

रणवीर ने कहा था कि मैं करीब साढे़ तीन साल तक सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहा था. मैं अलग-अलग चीजें ट्राई कर रहा था और ब्रेक पाने के लिए अलग-अलग रास्तों की तलाश में था. मुझे कामयाबी की कीमत चुकानी पड़ी है.” वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रणवीर ने साल 2010 में फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ से डेब्यू किया था. रणवीर की ये फिल्म इतनी सफल रही कि इनको दोबारा भटकने की जरुरत नहीं पड़ी. इसके बात रणवीर लगातार हिट पर हिट फिल्म देते गए और आज वो एक सुपरस्टार हैं. 

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