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Tigmanshu Dhulia News:जब जया बच्चन ने बचाई तिग्मांशु धूलिया की जान…’इलाहाबाद’ फिल्म के डायरेक्ट ने खुद बताई पूरी स्टोरी

Tigmanshu Dhulia News: Haasil में इरफान खान का एंटी-हीरो किरदार यादगार बना. पहले रोल Manoj Bajpayee को ऑफर हुआ, शूटिंग में भारी विवाद भी हुआ.

By: Shubahm Srivastava | Published: February 19, 2026 6:58:51 PM IST



Tigmanshu Dhulia On Jaya Bachchan: हिंदी सिनेमा का माहौल बदलने का बहुत सारा क्रेडिट बैंडिट क्वीन और सत्या जैसी फिल्मों को दिया जाता है. फिर भी, अगर कोई एक फिल्म है जिसने सच में ज़मीन से जुड़ी कहानी को दिखाया, तो वह तिग्मांशु धूलिया की डायरेक्ट की हुई फिल्म हासिल है. इस फिल्म में इरफान खान ने एक ऐसा रोल किया जिसने उन्हें पहचान दिलाई. उन्होंने एक ऐसा किरदार निभाया जिसे आम विलेन के बजाय एंटी-हीरो कहा जा सकता है, यह एक ऐसी परफॉर्मेंस है जिसे आज भी स्क्रीन पर उनके सबसे दमदार रोल में से एक माना जाता है. हालांकि, इरफान धूलिया की पहली पसंद नहीं थे. द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में फिल्ममेकर ने बताया कि उन्होंने शुरू में इस रोल के लिए अपने पुराने दोस्त और उस समय के उभरते हुए स्टार मनोज बाजपेयी से बात की थी.

मनोज बाजपेयी ने विलेन का रोल करने से मना कर दिया

बात करते हुए तिग्मांशु धूलिया ने कहा कि, “सच कहूँ तो, मैं शुरू में इरफ़ान के पास नहीं गया था. क्योंकि सत्या पहले ही रिलीज़ हो चुकी थी, तो मैं मनोज बाजपेयी के पास गया और वह स्टार बन चुके थे. मनोज और मैं बहुत अच्छे दोस्त थे, अब भी हैं. जब मैंने उन्हें कहानी सुनाई, तो उन्होंने कहा, ‘मैं विलेन का रोल नहीं करूँगा.’ मैंने उनसे कहा, ‘हाँ, वह विलेन हैं, लेकिन उस तरह के नहीं, वह एक दिलचस्प विलेन हैं.’ लेकिन वह मेरे दोस्त हैं; एक बार जब उन्होंने मना कर दिया, तो मैं उनके पास दोबारा नहीं गया. मैंने उन्हें और मनाने की ज़्यादा कोशिश भी नहीं की.”

तिग्मांशु धूलिया इरफ़ान खान के बारें में क्या कहा?

धूलिया ने आगे बताया कि इरफ़ान आखिरकार कैसे तैयार हुए. ‘फिर मैं इरफ़ान के पास गया और उन्हें पहले से पता था कि मैंने मनोज को पहले ही यह पिच कर दिया था. मैंने उन्हें शूट से दस दिन पहले इलाहाबाद भेजा और अपने कुछ दोस्तों को सौंप दिया. बस इतना ही. उन्होंने जगह घूमी, लोगों से मिले, मुझे सच में नहीं पता कि उन्होंने क्या किया, लेकिन उन्होंने वहीं और तभी कैरेक्टर को तुरंत पकड़ लिया.’

उसी बातचीत में, धूलिया ने यह भी बताया कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में शूट करने की कोशिश करते समय प्रोडक्शन को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक, बड़े अधिकारियों का मानना ​​था कि फिल्म में इंस्टीट्यूशन और स्टूडेंट पॉलिटिक्स को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है. हालात बहुत बिगड़ गए, और उन्हें शूटिंग जारी रखने पर धमकियां भी मिलने लगीं.

हासिल से ‘इलाहाबाद’ शब्द क्यों बैन किया गया

इस मुद्दे पर बात करते हुए तिग्मांशु धूलिया ने कहा कि, ‘मुझे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के ऑफिस बुलाया गया जहाँ यूनिवर्सिटी के सभी पुराने स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट बैठे थे. और उन्होंने मुझे चेतावनी दी कि वे हमारी सभी शूटिंग गाड़ियां तोड़ देंगे और मेरा चेहरा काला कर देंगे, मुझे गधे पर बिठा देंगे, और पूरे शहर में घुमाएंगे. और मैं अकेला था, वे सभी आदमी मेरे सामने बैठे थे, और मैं रोने लगा.’

जब जया बच्चन ने बचाई जान

बढ़ते गुस्से को देखते हुए, धूलिया ने आखिरकार जया बच्चन से मदद मांगी. ‘फिर आखिरकार मुझे जया जी को फोन करना पड़ा और उन्होंने मेरी बहुत मदद की. उन्होंने अमर सिंह जी को फोन किया और उन्होंने कुछ कॉल किए, और मेरे खिलाफ बगावत और दुश्मनी कम हो गई. लेकिन उन्होंने कहा कि आप फिल्म में ‘इलाहाबाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते, और किसी तरह मैंने बिना नाम का इस्तेमाल किए फिल्म बना ली.’

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