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गांव के लाल ने किया कमाल, JEE पास कर हासिल की AIR 85; IIT बॉम्बे में लिया दाखिला

Bharadhwaj Torati cracked JEE Advanced: आंध्र प्रदेश के अमलापुरम के रहने वाले 17 साल के छात्र भारद्वाज तोरती ने अच्छे अंकों से Joint Entrance Examination (JEE) पास कर ली है. उन्होंने JEE Advanced 2025 में ऑल इंडिया रैंक 85 हासिल कर अपने पिता का नाम रोशन किया है.

By: Preeti Rajput | Published: March 13, 2026 5:40:21 PM IST



Bharadhwaj Torati cracked JEE Advanced: आंध्र प्रदेश के अमलापुरम के रहने वाला भारद्वाज तोरती का नाम पूरे देश में सुर्खियां बन गया है. 17 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर JEE Advanced 2025 में ऑल इंडिया रैंक 85 हासिल की है. भारद्वाज ने अपनी स्कूली पढ़ाई Sir C V Raman School से की. 10वीं कक्षा में उन्होंने 600 में से 558 अंक हासिल किए थे. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने विजयवाड़ा के नारायणा कॉलेज में दाखिला लिया. 12वीं कक्षा में उन्होंने 1000 में से 989 अंक हासिल किए थे. 

मेहनत और धैर्य की कहानी 

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले भरद्वाज ने मेहनत, धैर्य और रणनीति की मिसाल पेश की है. उन्होंने शुरुआत से ही रोजाना अभ्यास और समझ के साथ तैयारी की. उनके मुताबिक, JEE जैसे कठिन एग्जाम में सफलता के लिए पढ़ाई और सही तरीके से अभ्यास करना बहुत जरुरी है. 

सफलता की चाबी 

भरद्वास ने बताया कि इंटरमीडियट के दौरान उन्होंने पूरी तरह से  JEE की तैयारी पर ध्यान देना शुरु किया. उनका मानना है कि  JEE में सफलता पाने के लिए आखिरी समय में रटने वाली पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है, रोजाना अभ्यास करना. लगातार अभ्यास करने से ही सफलता प्राप्त होती है. वह पढ़ाई करते समय इस बात का ध्यान रखते थे, कि जो भी विषय पढ़ रहे हैं, उसे पूरी तरह से समझें. अगर कोई टॉपिक उन्हें समझ नहीं आता, तो वह आगे नहीं बढ़ते थे. उन्होंने हर चीज पढ़ने की बजाए, उन टॉपिक्स पर ध्यान दिया, जो एग्जाम में ज्यादा जरूरी होते हैं. 

12 घंटे की रोज पढ़ाई

भरद्वाज का रोज का पढ़ाई का समय काफी करीब 12 घंटे का होता था. हालांकि, बीच-बीच में वह छोटा ब्रेक लेते थे, ताकि दिमाग ताजा रहे. 

इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री 

इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री भारद्वाज को काफी मुश्किल लगती थी, क्योंकि उसमें काफी कुछ याद रखना पड़ता है. लेकिन ज्यादा से ज्यादा सवाल हल करके और लगातार अभ्यास कर इस सब्जेक्ट के मजबूत किया जा सकता है. 

स्मार्ट रणनीति

भरद्वाज परीक्षा के दौरान सवालों को क्रम से हल करते थे. वह हर सवाल को देखकर पहले तय करते थे, कि क्या हल करना है या छोड़ना है. बाद में उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया. जो सवाल कठिन लगते थे, उन्हें छोड़ देते थे और समय मिलने पर बाद में फिर से उन्हें हल करने का प्रयास करते थे. भरद्वाज ने बहुत ज्यादा किताबों का सहारा नहीं लिया. उन्होंने स्टडी मटेरियल, NCERT की किताबें, क्लास नोट्स और कुछ रेफरेंस बुक्स से ही अपनी पूरी तैयारी की. 

परिवार का मिला पूरा साथ

भरद्वाज की सफलता में उनके परिवार ने अहम भूमिका निभाई है. उनके पिता शिवा रमन किसान है. वहीं उनकी मां एक गृहिणी हैं. भारद्वाज कहते ैहं कि परिवार के सहयोग और भरोसे ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की ताकत दी है. 

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IIT बॉम्बे में नई शुरुआत

Indian Institute of Technology Bombay में पढ़ाई के समय भारद्वाज अपनी कॉलेज लाइफ का इस समय पूरा आनंद ले रहे हैं. वह कई नई चीजें सीखते रहते हैं. उनका कहा है कि  IIT बॉम्बे तक का सफर सिर्फ पढ़ाई की सफलता नहीं है, बल्कि मेहनत और समझदारी की एक कहानी है. 

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