कांटी में कांटे की टक्कर; इसराइल बनाम अजीत, कौन मारेगा बाजी 2025 में?

Bihar election 2025: कांटी विधानसभा में फिर होगा सियासी संग्राम. इसराइल मंसूरी दोबारा जीत की कोशिश में हैं, तो अजीत कुमार बदला लेने के मूड में, 6 नवंबर को वोटिंग होगी और परिणाम 14 नवंबर को आएंगे, पूरा पढ़िए

Published by Team InKhabar

Bihar Election 2025: विधानसभा कांटी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है, जो वैशाली लोकसभा सीट का हिस्सा है.यह क्षेत्र कांटी और मरवां ब्लॉक मिलाकर बना है, और अब धीरे-धीरे शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है.ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र उपनिवेश काल में नील और साल्टपीटर के उत्पादन के लिए जाना जाता था.कांटी का स्थान मुजफ्फरपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर पश्चिम में है, 

यहां कौन से चरण में मतदान होगा

बिहार में आगामी चुनाव दो चरणों में होंगे. राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से एक कांटी भी है. यहां पहले चरण का मतदान 6 नवंबर 2025 को होगा और परिणामों की घोषणा 14 नवंबर को की जाएगी. इस सीट पर बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी और आरजेडी जैसे प्रमुख दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. चुनाव का माहौल पूरी तरह से प्रतिस्पर्धात्मक और रोमांचक रहने की उम्मीद है.

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किस पार्टी से कौन लड़ेगा.

1951 में स्थापित इस विधानसभा क्षेत्र ने अब तक 17 चुनाव देखे हैं. शुरू में कांग्रेस का वर्चस्व रहा जिसने पांच बार जीत हासिल की. बाद में समाजवादी एकता केंद्र, जनता दल और राजद जैसी पार्टियों ने भी यहां अपनी पकड़ मजबूत की. 2020 के विधानसभा चुनाव में कांटी सीट पर आरजेडी के मोहम्मद इसराइल मंसूरी ने जीत हासिल की. उन्होंने निर्दलीय अजीत कुमार को हराया, जो तीन बार विधायक रह चुके हैं. पहली बार 2005 में लोजपा के टिकट पर, फिर जदयू के टिकट पर 2005 और 2010 में जीते थे. 2015 में, अशोक कुमार चौधरी ने निर्दलीय चुनाव जीत लिया था. इस क्षेत्र में अब तक कांग्रेस पांच बार, जदयू, जनता दल और आरजेडी दो-दो बार जीते हैं, जबकि कई अन्य दल भी यहां अपनी सरकार बनाते रहे हैं. आपको बता दें की इस बार महागठबंधन से मोहम्मद इसराइल मंसूरी चुनाव लडे़गे जो की यहीं से 2020 में विधायक भी रहे हैं और NDA से अजीत कुमार को टिकट मिला है.

क्या है जीत का गणित?

2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने अपनी एकजुटता दिखाई और लोजपा की वीणा देवी ने कांटी में अच्छी जीत दर्ज की. इस क्षेत्र में लगभग 3,24,000 मतदाता हैं, जिनमें से मुस्लिम और अनुसूचित जाति के वोट खास महत्व रखते हैं. क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, जिसमें धान, मक्का और गन्ना प्रमुख फसलें हैं.हालांकि बुनियादी ढांचे की स्थिति अभी भी कमजोर है, जिससे विकास की गति धीमी है.

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