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6.5% की स्पीड से भागेगी भारत की अर्थव्यवस्था, Fitch Rating ने ट्रंप के टैरिफ को बताया फूस! BBB- रेटिंग रखा बरकरार

Fitch Ratings: फिच का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.5% रहेगी, जो 'BBB' श्रेणी के अन्य देशों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है।

Published by Divyanshi Singh

Fitch Ratings: दुनिया की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसियों में से एक, Fitch Ratings ने  भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘हेल्थ रिपोर्ट कार्ड’ जारी किया है।  फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफ़ॉल्ट रेटिंग (IDR) को ‘BBB-‘ पर बनाए रखा है। साथ ही, इसके भविष्य को ‘स्थिर’ बताया है। एजेंसी का कहना है कि मज़बूत आर्थिक विकास और ठोस विदेशी मामले भारत की रेटिंग को मज़बूती प्रदान करते हैं।

6.5% रहेगी GDP

फिच का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.5% रहेगी, जो ‘BBB’ श्रेणी के अन्य देशों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) और निजी खपत में स्थिरता के कारण घरेलू माँग मज़बूत बनी रहेगी। हालाँकि, निजी निवेश मामूली रहने की उम्मीद है।

टैरिफ का प्रभाव

फिच की माने तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर सीधा प्रभाव मामूली होगा। क्योंकि, अमेरिका को निर्यात भारत के सकल घरेलू उत्पाद का केवल 2% है, लेकिन यह अनिश्चितता व्यावसायिक मनोबल और निवेश को प्रभावित कर सकती है। एजेंसी को उम्मीद है कि बातचीत के बाद प्रस्तावित 50% टैरिफ में कमी की जाएगी। ट्रम्प का 50 प्रतिशत टैरिफ़ 27 अगस्त से लागू हो रहा है।

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खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट और रिज़र्व बैंक की नीतियों के कारण मुद्रास्फीति नियंत्रण में है। जुलाई में मुद्रास्फीति दर घटकर 1.6% रह गई। कोर मुद्रास्फीति 4% के आसपास स्थिर है। कम मुद्रास्फीति के कारण, वर्ष 2025 में रेपो दर में 0.25% की और कटौती की गुंजाइश है।

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राजकोषीय घाटा को लेकर कही ये बात

सरकार के राजकोषीय घाटे में सुधार हो रहा है इसका कारण राजस्व में वृद्धि और सब्सिडी कम खर्च है। वित्त वर्ष 2025 में केंद्र सरकार का घाटा 4.8% रहने का अनुमान है। जो वित्त वर्ष 2021 के 9.2% से काफ़ी बेहतर है। फ़िच का मानना ​​है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 में इसे 4.4% तक लाने के अपने लक्ष्य को हासिल कर लेगी। हालाँकि, सरकारी ऋण अभी भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।

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